मप्र विधानसभा: बजट सत्र के आठवें दिन सदन में निराश्रित गोवंश- सिंगरौली कोल माइंस जैसे मुद्दों पर हुआ जमकर हंगामा
भोपाल, 25 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के आठवें दिन बुधवार काे सदन में जमकर हंगामा हुआ। निराश्रित गोवंश, सिंगरौली की कोल माइंस, इंदौर का मास्टर प्लान और प्रदेश में बन रहे पुलों की गुणवत्ता जैसे मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने नजर आए।
कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने इंदौर के मास्टर प्लान को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मंत्री दावा कर रहे हैं कि मास्टर प्लान तैयार कर मुख्यमंत्री को सौंप दिया गया है, लेकिन वह अब भी मुख्यमंत्री कार्यालय में अटका हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और मंत्री के बीच खींचतान के कारण इंदौर जैसे ऐतिहासिक शहर का विकास प्रभावित हो रहा है। कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा- ये बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है कि मंत्री कह रहा है कि हमने मास्टर प्लान बना लिया, मुख्यमंत्री जी को दे दिया…अब मुख्यमंत्री जी के यहां रुका हुआ है। इंदौर औद्योगिक शहर है। 1995 के बाद वहां की जनता इंतजार कर रही है कि मास्टर प्लान बने और इंदौर का विकास हो। शहर व्यवस्थित बने लेकिन इन दोनों के झगड़े में इंदौर जैसे एतिहासिक शहर का मास्टर प्लान अटका हुआ है।
पीडब्ल्यूडी और ‘90 डिग्री ब्रिज’ पर घेरा
तराना विधायक महेश परमार ने लोक निर्माण विभाग पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब से राकेश सिंह पीडब्ल्यूडी मंत्री बने हैं, तब से पुलों के क्षतिग्रस्त होने के मामले बढ़े हैं। भोपाल में बने 90 डिग्री एंगल वाले ब्रिज का उल्लेख करते हुए उन्होंने पूछा कि यदि पुल तकनीकी रूप से सही था तो संबंधित अधिकारियों को निलंबित क्यों किया गया? सरकार को इस विरोधाभास पर जवाब देना चाहिए। यदि यह पुल सही बना था तो उन अधिकारियों को प्रोत्साहित क्यों नहीं किया? उनके ऊपर कारवाई करके उन्हें सस्पेंड क्यों किया, इसका जवाब दें।
पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने भोपाल के 90 डिग्री ब्रिज विवाद पर कहा कि देश में कई ऐसे ब्रिज हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐशबाग ब्रिज 90 नहीं बल्कि 119 डिग्री का है और संबंधित इंजीनियर पर कार्रवाई कोण की वजह से नहीं, बल्कि कर्व और स्लोप सही न बनने के कारण की गई है।
मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि प्रदेश में सड़कों के औचक निरीक्षण की व्यवस्था शुरू की गई है। हर महीने 5 तारीख से 20 तारीख के बीच यह निरीक्षण कराया जाता है। 13 महीने में 875 निर्माण कार्यों का इंस्पेक्शन हुआ। चार अभियंता सस्पेंड हुए, 25 ठेकेदार ब्लैक लिस्ट हुए, 329 निर्माण कार्यों में सुधार किया गया है। इस व्यवस्था में दंड और पुरस्कार दोनों ही तय किए गए हैं।
सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता से समझौता न हो, इसके लिए टेंडर की शर्तों में भी बदलाव किए जा रहे हैं। सभी निर्माण विभागों के लिए मानक निविदा शर्तें तय की जा रही हैं। विभाग प्रयोगशालाओं का भी उन्नयन कर रहा है। मोबाइल लैब भी चालू कर रहा है। बिटूमिन की क्वालिटी को लेकर भी विभाग सख्त हुआ है। लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने कहा- 26 विधायकों ने विभाग की अनुदान मांगों पर अपने प्रस्ताव दिए। 4 घंटे तक इस पर चर्चा चली है। पक्ष-विपक्ष दोनों की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को लेकर सुझाव आए। यह स्पष्ट है कि सभी विकास कार्य चाहते हैं। दलगत परिस्थितियां अलग बात हैं।
निराश्रित गोवंश से किसान परेशान
कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने निराश्रित गोवंश की समस्या को गंभीर बताते हुए कहा कि किसान अपनी फसल बचाएं या सड़कों और खेतों में घूम रहे गोवंश को संभालें। हेमंत कटारे ने कहा कि परेशान किसान खेतों में करंट लगाने तक को मजबूर हो रहे हैं, जिससे गोवंश के साथ-साथ बच्चों की जान को भी खतरा पैदा हो रहा है।
पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने जवाब में बताया कि 25 जिलों में गौशालाओं के लिए जमीन चिन्हित की गई है। जबलपुर, रायसेन, दमोह, सागर, अशोकनगर, खरगोन और रीवा में टेंडर जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लगभग 10 लाख निराश्रित गोवंश हैं, जिनमें से 4 लाख को नई व्यवस्था के तहत सुरक्षित स्थान मिल सकेगा।
सिंगरौली में कोल माइंस और पेड़ कटाई पर टकराव
सिंगरौली में Adani Group की कोल माइंस के लिए हो रही पेड़ कटाई का मुद्दा भी गरमाया। कांग्रेस विधायक सेना पटेल ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जंगलों और आदिवासियों को उजाड़ने की नीति पर काम कर रही है। जयवर्धन सिंह ने कहा कि भाजपा अदाणी के हितों की रक्षा में अधिक सक्रिय दिखती है।
इस पर भाजपा विधायक रामनिवास शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि पेड़ कटाई से सिंगरौली को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने तर्क दिया कि कोयला बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक है और बिजली के बिना विकास संभव नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि खदानें नीलामी प्रक्रिया के तहत आवंटित होती हैं और वहां केवल अदाणी ही नहीं, बल्कि Essar Group, Jaypee Group और Northern Coalfields Limited जैसी कंपनियां भी कार्यरत हैं। असली मुद्दा विस्थापन और मुआवजा है, जिस पर सरकार काम कर रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे