ओवैसी ने किया यूसीसी का विरोध, भोपाल में बोले- आदिवासियों जैसे मुस्लिमों के भी कानून
भोपाल, 15 सितम्बर (हि.स.)। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मध्य प्रदेश में करीब 21 फीसदी आदिवासियों को यूसीसी से बाहर रखा गया है, जबकि मुसलमानों को इसमें शामिल किया गया है। मुसलमानों के भी अपने धार्मिक कानून और पहचान हैं। एक धर्म के कानून दूसरे पर थोपना गलत है।
एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी मंगलवार देर शाम मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल पहुंचे थे। उन्होंने यहां सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के विरोध में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने सवाल किया कि जब आदिवासियों की अलग संस्कृति, परंपरा और धर्म के कारण उन्हें यूसीसी से बाहर रखा गया है तो मुसलमानों को इसमें क्यों शामिल किया गया।
ओवैसी ने सभा को संबोधित करते हुए राज्य सरकार पर यूसीसी के जरिए हिंदू मैरिज एक्ट, हिंदू सक्सेशन एक्ट और अडॉप्शन एंड कस्टडी एक्ट जैसे कानून गैर-हिंदुओं पर लागू करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29 का हवाला देते हुए कहा कि धर्म की स्वतंत्रता और अधिकारों को खत्म करके कानून लागू नहीं किया जा सकता।
ओवैसी ने एनडीए के सहयोगी दलों से भी यूसीसी का विरोध करने की अपील की। टीडीपी, जेडीयू, चिराग पासवान, एचडी कुमारस्वामी और जयंत चौधरी का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि अगर भाजपा से उनका वैचारिक अंतर अभी बाकी है तो उन्हें यूसीसी का विरोध करना चाहिए।
भाजपा विधायक रामेश्वर को दी चुनौती
सभा में ओवैसी ने भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा पर भी निशाना साधा। शर्मा के काजी कैंप में मिसाइल लॉन्च करने वाले बयान का जिक्र करते हुए ओवैसी ने उन्हें काजी कैंप आने की चुनौती दी। उन्होंने काजी कैंप से जुड़े स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले कई लोगों के नाम भी गिनाए। उन्होंने कहा कि वह अकेले काजी कैंप में खड़े होने और शहीद होने के लिए तैयार हैं, लेकिन रामेश्वर शर्मा जैसे लोगों के सामने सिर नहीं झुकाएंगे।
सागर जहरीली शराब मामले में कार्रवाई की मांग
ओवैसी ने भाजपा शासित राज्यों में मस्जिदों और कब्रिस्तानों को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया। वहीं, सागर जहरीली शराब मामले में मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग की। लव जिहाद के सवाल पर उन्होंने कहा कि दो बालिग अपनी इच्छा से शादी करना चाहते हैं तो उन्हें रोकने वाले सरकार या दूसरे लोग कौन होते हैं। सभा के दौरान ओवैसी ने सोवियत यूनियन का उदाहरण देते हुए टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा मदरसे बंद किए जाने के बावजूद मुसलमानों ने अपने बच्चों को घरों में पढ़ाया।
जनसभा से पहले भोपाल पहुंचने पर ओवैसी ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का विरोध करते हुए कहा कि संविधान नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता देता है। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान में अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29 के तहत नागरिकों को समानता और अपने धर्म का पालन करने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड से शुरू होकर गुजरात और असम तक पहुंचा यूसीसी गैर-हिंदुओं पर हिंदू उत्तराधिकार कानून, हिंदू विवाह कानून और हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण से जुड़े कानून लागू करने की कोशिश है। ओवैसी ने इसे गलत बताते हुए कहा कि एक धर्म के कानून को दूसरे धर्म के लोगों पर लागू करना समानता और धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से उनकी पार्टी समान नागरिक संहिता का विरोध कर रही है।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि यूसीसी देश के करीब 18 करोड़ मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके जरिए संविधान के अनुच्छेद 26 और 29 से मिले अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। सरकार का उद्देश्य अल्पसंख्यकों के अधिकार खत्म करना है। ओवैसी ने कहा कि उत्तराखंड और दूसरे राज्यों में जिस तरह का यूसीसी लागू किया गया है, उसी मॉडल को मध्य प्रदेश में भी लागू किया जा रहा है। उन्होंने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार की नीति पर सवाल उठाए। यूसीसी को लेकर ओवैसी पहले भी आरोप लगा चुके हैं कि यह समानता के बजाय मुसलमानों को निशाना बनाने की कोशिश है।
एआईएमआईएम प्रमुख ने भाजपा शासित राज्यों में धार्मिक स्थलों को लेकर भी सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां-जहां भाजपा की सरकार है, वहां मस्जिदों और कब्रिस्तानों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकास और अन्य कार्रवाइयों के नाम पर अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है।
ओवैसी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भी पार्टी की रणनीति पर बात की। उन्होंने कहा कि एआईएमआईएम यूपी में कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, यह फिलहाल तय नहीं है। उनका कहना था कि भाजपा की तीसरी बार सरकार नहीं बननी चाहिए और इसके लिए उनकी पार्टी सभी दलों के साथ गठबंधन के लिए तैयार है। उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब कांग्रेस के साथ कुछ भी गलत होता है तो एआईएमआईएम को 'बी टीम' बताया जाता है। ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी अपने राजनीतिक फैसले खुद लेती है और किसी के दबाव में काम नहीं करती।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू होगा यूसीसी
गौरतलब है कि गौरतलब है कि मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में यूसीसी लागू करने की तैयारी कर ली है। मध्य प्रदेश विधानसभा से 21 जुलाई को पारित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही इसके प्रावधान प्रदेश में प्रभावी हो सकेंगे। इसके बाद विधि एवं विधायी विभाग राजपत्र में अधिसूचना जारी करेगा। यूसीसी में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों के लिए समान कानूनी व्यवस्था का प्रावधान है। इसमें एक से अधिक विवाह पर रोक, विवाह का अनिवार्य पंजीयन और लिव-इन संबंधों के पंजीयन की व्यवस्था की गई है। महिला और पुरुष को उत्तराधिकार में समान अधिकार देने का भी प्रावधान है। अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर