मप्र में एंटीलोप रेस्क्यू एवं स्थानांतरण अभियान संपन्न, कुल 1820 वन्यजीवों का हुआ सुरक्षित रेस्क्यू

 


उज्जैन, 04 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में किसानों को फसल क्षति से राहत दिलाने, मानव–वन्यप्राणी द्वंद्व को कम करने तथा वन्यजीवों के संरक्षण के उद्देश्य से संचालित एंटीलोप (कृष्णमृग एवं नीलगाय) रेस्क्यू एवं स्थानांतरण अभियान 2026 बुधवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस अभियान में 1,820 वन्यजीवों का सुरक्षित रेस्क्यू एवं संरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरण किया गया। इस पूरे अभियान में एक भी वन्यजीव की मृत्यु नहीं है।

जिला प्रशासन द्वारा जानकारी दी गई कि अभियान के अंतिम दिन बुधवार को उज्जैन जिले के ग्राम पिपल्याबीच्छा में 81 नीलगायों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया। इसके साथ ही इस वर्ष प्रदेश में अभियान के अंतर्गत कुल 1,820 वन्यजीवों का रेस्क्यू कर सुरक्षित रूप से संरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित किया गया है। इनमें 1,507 कृष्णमृग (ब्लैकबक) एवं 313 नीलगाय शामिल हैं।

जिलेवार उपलब्धि के अंतर्गत शाजापुर जिले में 1,594 तथा उज्जैन जिले में 226 वन्यजीवों का रेस्क्यू किया गया। इस अभियान की एक विशेष उपलब्धि यह रही कि अब तक पूरे अभियान में रेस्क्यू किए गए किसी भी वन्यजीव की मृत्यु नहीं हुई। सभी वन्यजीवों का सुरक्षित रेस्क्यू एवं स्थानांतरण सुनिश्चित किया गया।

आज बोमा स्थल पर मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक डॉ. समीता राजोरा ने पहुंचकर अभियान में शामिल सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, विशेषज्ञों एवं सहयोगियों को इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने पूरी टीम के समर्पण, समन्वय एवं प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में भी इसी प्रतिबद्धता के साथ वन्यजीव संरक्षण के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस व्यापक अभियान में दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञ संस्था कंजर्वेशन सॉल्यूशंस, पशु चिकित्सकों, वन विभाग के अधिकारियों एवं मैदानी अमले ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हेलीकॉप्टर की सहायता से वन्यजीवों की हर्डिंग तथा वैज्ञानिक बोमा तकनीक के माध्यम से उनका सुरक्षित रेस्क्यू और स्थानांतरण इस अभियान की प्रमुख विशेषताएं रहीं।

यह अभियान किसानों और वन्यजीव संरक्षण, दोनों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे किसानों को फसल क्षति एवं मानव–वन्यप्राणी द्वंद्व से राहत मिलने में मदद मिलेगी, वहीं वन्यजीवों को संरक्षित क्षेत्रों में सुरक्षित प्राकृतिक आवास उपलब्ध हुए हैं। वन विभाग ने जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्रामवासियों, किसानों, सामाजिक संगठनों, दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञों तथा अभियान में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर