मुरैना : 110 करोड़ की आसन सिंचाई परियोजना पर लापरवाही का ग्रहण, 12 साल बाद भी अधूरा विस्थापन

 


मुरैना, 19 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश में किसानों को राहत देने और मुरैना-भिंड क्षेत्र की हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई आसन सिंचाई परियोजना सरकारी लापरवाही के कारण अधर में लटकी नजर आ रही है। करीब 110 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी परियोजना का वास्तविक लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाया है।

आसन नदी पर जौरा क्षेत्र के हथरिया गांव के पास वर्ष 2018 में आसन वेराज का निर्माण पूरा हुआ था। 30 एमसीएम जल क्षमता वाले इस बांध में छह इलेक्ट्रॉनिक गेट लगाए गए हैं, लेकिन निर्माण के वर्षों बाद भी इन गेटों को एक बार भी बंद नहीं किया जा सका। इसके कारण बांध में पानी का भंडारण नहीं हो पाया और 5500 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का इंतजार है।

निर्माण एजेंसी की गारंटी अवधि भी वर्ष 2022 में समाप्त हो चुकी है, लेकिन परियोजना की मुख्य समस्या अब तक दूर नहीं हो सकी है।

विस्थापन बना सबसे बड़ी बाधा

परियोजना के डूब क्षेत्र में आने वाले गदाल का पुरा गांव के विस्थापन का मामला सबसे बड़ा अड़ंगा बना हुआ है। करीब 12 साल बाद भी 200 परिवारों का पूरी तरह विस्थापन नहीं हो पाया है।

प्रशासन द्वारा 158 परिवारों को जमीन और आवास के लिए पांच-पांच लाख रुपये की सहायता राशि दी गई है, लेकिन 43 परिवारों ने नकद राशि लेने से इनकार करते हुए प्लॉट की मांग रखी है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी पूरी जमीन का मुआवजा नहीं मिला और शेष जमीन तक पहुंचने के लिए रास्ते की व्यवस्था भी नहीं की गई।

प्रशासन ने ग्रामीणों के पुनर्वास के लिए मुरैना में एनएच-44 के किनारे प्लॉट देने की योजना बनाई है, लेकिन ग्रामीण इसकी गुणवत्ता और सुविधाओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

112 करोड़ खर्च, फिर भी पानी का इंतजार

आसन वेराज के निर्माण पर करीब 45 करोड़ रुपये और पुनर्वास कार्यों पर 67 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद विस्थापन पूरा नहीं होने के कारण इस मानसून में भी बांध के गेट बंद होने की संभावना कम दिखाई दे रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी परियोजना केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी।

परियोजना एक नजर में

योजना की शुरुआत : वर्ष 2014

निर्माण प्रारंभ : वर्ष 2017

कुल लागत : करीब 112 करोड़ रुपये

बांध लागत : 45 करोड़ रुपये

पुनर्वास लागत : 67 करोड़ रुपये

सिंचाई लक्ष्य : 5500 हेक्टेयर भूमि

जल भंडारण क्षमता : 30 एमसीएम

डूब क्षेत्र : 610 हेक्टेयर

वर्तमान स्थिति : 2018 से गेट खुले, जल भंडारण शून्य

ग्रामीण अमर सिंह कुशवाह, महामंत्री अखिल भारतीय कुशवाह महासभा ने कहा कि उनकी आधी जमीन ली गई है, जबकि आधी जमीन का समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने शासन से जल्द समस्या दूर करने की मांग की।

ग्रामीण छोटा सिंह कुशवाह ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायतों के बाद भी सुनवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, वे गांव खाली नहीं करेंगे।

मुरैना एडीएम अश्विनी रावत ने कहा कि उन्हें फिलहाल परियोजना की पूरी जानकारी नहीं है। जानकारी मिलने के बाद पूरे मामले की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि बांध के गेट बंद नहीं हो पा रहे हैं तो परियोजना का उद्देश्य पूरा नहीं होगा और जो भी बाधाएं हैं उन्हें दूर कराया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार/उपेंद्र

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा