सागर में बारिश का गहरा संकट: सामान्य से 68% कम वर्षा, खरीफ फसलों पर मंडराया नुकसान का खतरा
सागर, 07 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर जिले में इस वर्ष कमजोर मानसून ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में खड़ी खरीफ फसलें प्रभावित होने लगी हैं। जिले में अब तक सामान्य वर्षा का एक-तिहाई से भी कम पानी गिरा है, जबकि पिछले वर्ष की तुलना में भी वर्षा में आधे से अधिक की कमी दर्ज की गई है। ऐसे में सोयाबीन, उड़द और धान जैसी प्रमुख फसलों के उत्पादन पर संकट गहराने लगा है।
कार्यालय कलेक्टर (भू-संसाधन प्रबंधन) द्वारा 7 अगस्त 2026 को जारी दैनिक वर्षा प्रतिवेदन के अनुसार, जिले की सामान्य औसत वर्षा 1230.5 मिलीमीटर (48.44 इंच) निर्धारित है। इसके विपरीत 1 जून से 7 अगस्त 2026 तक जिले में औसतन केवल 386.1 मिलीमीटर (15.2 इंच) वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य वर्षा का महज 31.37 प्रतिशत है। यानी जिले में अब तक लगभग 68.63 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष इसी अवधि तक जिले में 794.3 मिलीमीटर (31.3 इंच) वर्षा दर्ज की गई थी। इस बार पिछले वर्ष की तुलना में 408.2 मिलीमीटर कम पानी बरसा है, जो लगभग 51.39 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है।
जिले के वर्षामापी केंद्रों के आंकड़े भी वर्षा की असमान स्थिति को उजागर करते हैं। शाहगढ़ में सबसे कम 186.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। इसके बाद मालथौन में 236.7 मिलीमीटर तथा सागर मुख्यालय में 267.3 मिलीमीटर बारिश हुई। वहीं देवरी में सर्वाधिक 677.1 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है। गढ़ाकोटा में 539.5 मिलीमीटर और रहली में 506.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई, जो जिले के अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर स्थिति मानी जा रही है।
दैनिक वर्षा प्रतिवेदन के अनुसार, 7 अगस्त को जिले में औसतन केवल 4.9 मिलीमीटर (0.2 इंच) बारिश हुई। इस दौरान खुरई वर्षामापी केंद्र पर सर्वाधिक 53 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। जिले का अधिकतम तापमान 31.3 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 23.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
बारिश की लंबी कमी के कारण खेतों की नमी तेजी से घट रही है और कई स्थानों पर जमीन में दरारें दिखाई देने लगी हैं। सिंचाई के सीमित साधनों वाले किसानों के सामने फसल बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी और लगातार बारिश नहीं हुई, तो खरीफ फसलों का उत्पादन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है और खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा।
कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि वर्षा में भारी कमी का असर केवल खरीफ सीजन तक सीमित नहीं रहेगा। पर्याप्त जलभराव नहीं होने से भूजल स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं होगा, जिससे आगामी रबी सीजन की बुआई और सिंचाई व्यवस्था भी प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में जिले में समय पर अच्छी वर्षा होना किसानों के साथ-साथ कृषि व्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे