सागरः विधायक शैलेंद्र जैन ने मुख्यमंत्री से भेंट कर शिक्षक पात्रता परीक्षा नियम पर पुनर्विचार की मांग की

 


सागर, 07 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर विधायक शैलेंद्र कुमार जैन ने मंगलवार को भोपाल प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता का नियम को लेकर चर्चा की। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस नियम पर सहानुभूतिपूर्वक पुनर्विचार करने का आग्रह किया।

दरअसल, विगत दिनों मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने सागर स्थित विधायक निवास पर पहुंचकर एक ज्ञापन सौंपा था। शिक्षकों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए विधायक जैन ने इस विषय को सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने बताया कि ये शिक्षक केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं।

मुलाकात के दौरान विधायक शैलेंद्र जैन ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया कि प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों की नियुक्तियां समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और विधिक प्रावधानों के तहत ही की गई हैं। इन शिक्षकों ने पिछले 25-30 वर्षों से अपना जीवन शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित किया है। उनके अनुभव और कौशल के कारण ही प्रदेश के शैक्षणिक स्तर में सुधार हुआ है। इतनी लंबी सेवा के बाद अब पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता लागू करना शिक्षकों के मनोबल को गिरा रहा है। इससे शिक्षकों में असुरक्षा और असंतोष का भाव पैदा हो रहा है।

विधायक ने अवगत कराया कि अन्य राज्यों ने भी इस विषय की गंभीरता को देखते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिकाएं दायर की हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से निवेदन किया कि मध्य प्रदेश शासन भी एक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाए। उन्होंने मांग की कि प्रदेश के हजारों अनुभवी शिक्षकों के हितों और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए राज्य सरकार को शीघ्र ही सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करनी चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे