मैहर : चूना भट्ठों की चिमनियों से निकल रहा जहरीला धुआं, जनजीवन प्रभावित
मैहर, 7 नवम्बर (हि. स.)। मध्य प्रदेश के मैहर जिले के झुकेही क्षेत्र में संचालित चूना और छूही भट्ठों से निकलने वाला धुआं, धूल और हानिकारक गैसें पर्यावरण के साथ आमजन के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बनती जा रही हैं। क्षेत्र में भट्ठों की चिमनियां लगातार धुआं उगल रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की निगरानी और कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रदूषण के कारण आसपास के इलाकों में जनजीवन प्रभावित हो रहा है और लोग विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान हैं।
जिले के अन्य क्षेत्रों में प्रदूषण को लेकर कभी-कभार कार्रवाई की जाती है, लेकिन झुकेही क्षेत्र में जिम्मेदार विभागों की सक्रियता नजर नहीं आ रही है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। क्या विभाग की निगरानी केवल रेलवे साइडिंग तक सीमित रह गई है? क्या चूना और छूही भट्ठों में पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जा रहा है? इन भट्ठों से निकलने वाले धुएं और गैसों की जांच कब होगी, यह बड़ा सवाल है।
स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा
जानकारों के अनुसार चूना भट्ठों से निकलने वाले धुएं में कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और धूल के सूक्ष्म कण हो सकते हैं। इनके लगातार संपर्क में रहने से सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के साथ आंखों में जलन, पानी आना, लालिमा और त्वचा संबंधी एलर्जी की शिकायतें भी हो सकती हैं। कार्बन मोनोऑक्साइड का अधिक संपर्क शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है और हृदय संबंधी जोखिम बढ़ा सकता है।
खेती और पर्यावरण पर भी असर
भट्ठों से निकलने वाली धूल आसपास के खेतों और पेड़-पौधों की पत्तियों पर जमा हो सकती है। इससे पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया प्रभावित होने और फसलों की पैदावार घटने की आशंका रहती है। वहीं, प्रदूषक तत्वों के मिट्टी में जमा होने से उसकी गुणवत्ता और कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
सर्दियों में स्मॉग की आशंका
भट्ठों से निकलने वाला धुआं और धूल आसपास के वातावरण की वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड जैसी ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन जलवायु परिवर्तन में योगदान देता है। वहीं, सर्दियों में धूल और धुएं के एकत्र होने से स्मॉग जैसी स्थिति बनने की आशंका रहती है, जिससे दृश्यता प्रभावित होने के साथ सड़क यातायात में भी परेशानी हो सकती है।
अब जरूरत है कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग झुकेही क्षेत्र के चूना और छूही भट्ठों का निरीक्षण कराए। चिमनियों से निकलने वाले उत्सर्जन की वैज्ञानिक जांच, पर्यावरणीय मानकों के पालन और आसपास की वायु गुणवत्ता की निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा हो सके।
हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी