मैहर : सीमेंट कंपनियों के सीएसआर फंड पर फिर उठे सवाल, प्रभावित गांवों की अनदेखी का आरोप
मैहर, 31 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मैहर जिले में संचालित सीमेंट कंपनियों के कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) फंड के उपयोग को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। आरोप है कि सीमेंट संयंत्रों से प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के बजाय सीएसआर की बड़ी राशि नगर क्षेत्र में खर्च की जा रही है, जबकि प्रभावित गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। इसी बीच बरहिया में प्रस्तावित कचरा डंपिंग ग्राउंड का मुद्दा भी ग्रामीणों के विरोध का कारण बन गया है।
जिला पंचायत सदस्य देवदत्त सोनी ने ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर बरहिया में प्रस्तावित कचरा डंपिंग ग्राउंड का विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि जिन गांवों ने औद्योगिक गतिविधियों का प्रभाव झेला है, उन्हें विकास योजनाओं का लाभ मिलने के बजाय नगर का कचरा दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है।
सीएसआर फंड के उपयोग को लेकर इससे पहले भी सवाल उठ चुके हैं। आरसीसीपीएल की जनसुनवाई के दौरान जिला पंचायत सदस्य जयंती तिवारी ने भी आरोप लगाया था कि सीमेंट कंपनियों की सामाजिक उत्तरदायित्व निधि का उपयोग प्रभावित गांवों के बजाय नगर क्षेत्र में अधिक किया जा रहा है। अब देवदत्त सोनी ने भी इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि कुछ ग्रामीण जनप्रतिनिधि सीमेंट कंपनियों से जुड़े ठेकों और निजी हितों के कारण स्थानीय समस्याओं को अपेक्षित मजबूती से नहीं उठा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि उद्योगों से प्रभावित गांवों को रोजगार, सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अधिकार मिलना चाहिए। उनका मानना है कि सीएसआर फंड का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर उन्हीं क्षेत्रों में होना चाहिए, जहां उद्योगों का सीधा प्रभाव पड़ा है।
ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से गांव-गांव चौपाल लगाकर लोगों से संवाद करने और सीमेंट कंपनियों के सीएसआर फंड के पारदर्शी उपयोग के साथ प्रभावित गांवों के अधिकार सुनिश्चित कराने के लिए ठोस पहल करने की मांग की है।
हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी