स्लीमनाबाद टनल बनने से विंध्य-महाकौशल में सिंचाई और विकास की नई उम्मीद : डॉ. मोहन यादव
कटनी/मैहर, 17 जुलाई (हि. स.)। मध्य प्रदेश की बहुप्रतीक्षित स्लीमनाबाद टनल परियोजना अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को परियोजना स्थल का निरीक्षण कर इसे प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक सुरंग नहीं, बल्कि विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की कृषि, पेयजल और आर्थिक विकास की दिशा बदलने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि टनल के संचालन के बाद जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिलों के करीब 1450 गांवों की लगभग 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी। इससे क्षेत्र की खेती को नई मजबूती मिलेगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि टनल निर्माण का कार्य कई वर्षों तक तकनीकी और भौगोलिक चुनौतियों के कारण धीमा रहा। वर्ष 2015 तक सीमित खुदाई हो पाई थी, लेकिन बाद में आधुनिक जर्मन मशीनों और नई तकनीकों की मदद से कार्य में तेजी आई। निर्माण के दौरान इंजीनियरों, तकनीशियनों और श्रमिकों ने कठिन परिस्थितियों में लगातार काम किया, जिसके परिणामस्वरूप अब परियोजना अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 में नई सरकार बनने के समय परियोजना कई चुनौतियों से घिरी हुई थी। ठेकेदार के पीछे हटने और मशीनों के पुराने हो जाने जैसी परिस्थितियों के बावजूद सरकार ने परियोजना को पूरा करने का संकल्प नहीं छोड़ा। अब इसके पूरा होने से सिंचाई क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
इंजीनियरिंग का अनूठा उदाहरण
मुख्यमंत्री ने स्लीमनाबाद टनल को आधुनिक इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट नमूना बताते हुए कहा कि नर्मदा का पानी इस सुरंग के माध्यम से गुरुत्वाकर्षण के आधार पर सोन नदी के जलग्रहण क्षेत्र तक पहुंचेगा। उनके अनुसार यह परियोजना भविष्य में इंजीनियरिंग संस्थानों के लिए अध्ययन का विषय बन सकती है। उन्होंने दावा किया कि विशेष तकनीक से निर्मित यह सुरंग लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी और भूकंप जैसी परिस्थितियों का भी सामना करने में सक्षम होगी।
उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए लगभग 1600 करोड़ रुपये की लागत में केंद्र सरकार ने करीब 275 करोड़ रुपये का सहयोग दिया है, जबकि शेष राशि राज्य सरकार ने उपलब्ध कराई।
सिंचाई क्षमता में होगा विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के माध्यम से रीवा, सतना, मैहर, पन्ना और कटनी जिलों में लगभग ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित होगी। साथ ही कई क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता में भी सुधार होगा और आवश्यकता अनुसार जलविद्युत उत्पादन की भी संभावना बनेगी।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में सिंचाई क्षमता लगातार बढ़ाई जा रही है। पहले जहां लगभग 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित था, वहीं अब यह क्षमता बढ़कर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है।
किसान कल्याण वर्ष में बड़ी पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष के दौरान यह परियोजना किसानों के लिए महत्वपूर्ण सौगात साबित होगी। आगामी महीनों में रबी फसल के लिए लगभग एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने किसानों से अपनी कृषि भूमि सुरक्षित रखने की अपील करते हुए कहा कि सिंचाई सुविधा मिलने के बाद इस क्षेत्र की कृषि संभावनाएं काफी बढ़ेंगी।
कठिन परिस्थितियों में हुआ निर्माण
करीब 11.952 किलोमीटर लंबी इस सुरंग का निर्माण विंध्य पर्वतमाला के भीतर किया गया है। निर्माण के दौरान कठोर चट्टानों, भूमिगत जल रिसाव, चूना पत्थर की गुफाओं और धंसने वाली मिट्टी जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर सुरंग के भीतर प्रति मिनट हजारों लीटर पानी का रिसाव भी हुआ। प्रारंभिक मशीन क्षतिग्रस्त होने के बाद अत्याधुनिक जर्मन मशीन और विशेष ग्राउटिंग तकनीक का उपयोग कर निर्माण कार्य पूरा किया गया।
निर्माण एजेंसी ने घनी आबादी, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे ट्रैक के नीचे से सुरंग निकालते हुए सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा।
परियोजना की लागत और वर्तमान स्थिति
स्लीमनाबाद टनल का निर्माण कार्य वर्ष 2008 में शुरू हुआ था। प्रारंभिक लागत लगभग 799 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी, लेकिन तकनीकी चुनौतियों और अतिरिक्त कार्यों के कारण परियोजना लागत बढ़कर लगभग 1610 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में परियोजना का लगभग 97 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है तथा मुख्य टनल और ओपन कट नहर का निर्माण पूर्ण हो गया है।
पांच जिलों को मिलेगा सीधा लाभ
टनल के चालू होने के बाद कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिलों के बड़े हिस्से में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। परियोजना से लाखों किसानों को लाभ मिलने के साथ कृषि उत्पादन में वृद्धि और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार के अनुसार चरणबद्ध तरीके से सिंचाई नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। दिसंबर 2026 और उसके बाद दिसंबर 2027 तक अतिरिक्त क्षेत्रों को सिंचाई सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे परियोजना का पूरा लाभ किसानों तक पहुंच सकेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी