एक कमरे में पांच कक्षाएं, अब यात्री प्रतीक्षालय में पढ़ रहे नौनिहाल, कलेक्टर ने लिया संज्ञान

 


मैहर, 10 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन मैहर जिले की झांझबरी ग्राम पंचायत से सामने आई तस्वीर इन प्रयासों के बीच जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। यहां प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को पढ़ने के लिए पर्याप्त भवन तक उपलब्ध नहीं है। हालत यह है कि एक कमरे में कक्षा पहली से पांचवीं तक की पढ़ाई संचालित होती रही और अब बारिश के कारण उस भवन को शिक्षा विभाग ने अयोग्य घोषित कर दिया है। इसके बाद नौनिहाल यात्री प्रतीक्षालय में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

कहा जाता है कि किसी भी मजबूत इमारत की मजबूती उसकी नींव पर निर्भर करती है। इसी तरह बच्चों के भविष्य की नींव उनकी प्राथमिक शिक्षा होती है। यदि शुरुआती शिक्षा के लिए ही पर्याप्त संसाधन और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध नहीं हो तो बच्चों को बेहतर भविष्य की ओर ले जाने की चुनौती और बढ़ जाती है। झांझबरी ग्राम पंचायत के ग्राम रझौड़ी से सामने आई स्थिति इसी चिंता को सामने रखती है।

एक कमरे में पांच कक्षाएं, कैसे होगी पढ़ाई?

ग्राम रझौड़ी में प्राथमिक विद्यालय का संचालन लंबे समय से महज एक कमरे में किया जा रहा था। कक्षा पहली से लेकर पांचवीं तक के बच्चों को इसी एक कमरे में पढ़ाया जाता था। अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक ही स्थान पर पढ़ाना अपने आप में शिक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति को उजागर करता है। छोटे बच्चों की उम्र और कक्षाओं के अलग-अलग पाठ्यक्रम के बीच एक कमरे में पांच कक्षाओं का संचालन किस तरह प्रभावी शिक्षा सुनिश्चित कर सकता है, यह बड़ा सवाल है।

समस्या यहीं खत्म नहीं हुई। बारिश के चलते स्कूल भवन की स्थिति खराब होने के बाद शिक्षा विभाग ने उसे अयोग्य घोषित कर दिया। विभाग ने भवन को अनुपयुक्त घोषित कर अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारी पूरी कर दी, लेकिन इसके बाद बच्चों की पढ़ाई कहां और किस व्यवस्था में होगी, इस सवाल का समाधान समय रहते नहीं किया जा सका। नतीजा यह हुआ कि जिन बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए, वे अब यात्री प्रतीक्षालय में बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं।

सीमेंट हब में सीएसआर और डीएमएफ के उपयोग पर सवाल

झांझबरी ग्राम पंचायत के सरपंच रवेंद्र मिश्रा ने इस स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि मैहर सीमेंट हब के रूप में जाना जाता है। क्षेत्र में तीन-तीन सीमेंट उद्योग संचालित हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इन उद्योगों के सीएसआर फंड और डीएमएफ फंड का उपयोग बच्चों के लिए स्कूल भवन जैसी मूलभूत जरूरत पूरी करने में क्यों नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि शिक्षा ऐसी पूंजी है, जिसका लाभ बच्चों को जीवनभर मिलता है। ग्राम पंचायत की ओर से स्कूल भवन सहित आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर कई बार प्रस्ताव पारित कर संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई, लेकिन इसके बावजूद हालात में अपेक्षित बदलाव नहीं आया।

सरपंच ने जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आवश्यक कदम उठाने की मांग की है, ताकि बच्चों को यात्री प्रतीक्षालय में पढ़ने की मजबूरी से मुक्ति मिल सके।

मामले की जानकारी मैहर कलेक्टर विदिशा मुखर्जी को दी गई। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लिया और स्कूल भवन के निर्माण सहित बच्चों के लिए प्राथमिक आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।

स्थानीय स्तर पर कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद उम्मीद जगी है कि लंबे समय से चली आ रही यह समस्या अब जल्द दूर होगी। बच्चों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित विद्यालय भवन उपलब्ध होने से उनकी पढ़ाई भी सामान्य रूप से संचालित हो सकेगी।

फिलहाल झांझबरी पंचायत की यह तस्वीर इस बात पर सोचने के लिए मजबूर करती है कि जब प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने की बात की जा रही है, तब ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को पढ़ने के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है। अब निगाह इस बात पर है कि कलेक्टर के निर्देश के बाद स्कूल भवन और अन्य व्यवस्थाओं को धरातल पर कितनी जल्दी उतारा जाता है।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी