महाकाल को रजत मुकुट-रुद्राक्ष से सजाया, शेषनाग का रजत मुकुट और मुण्डमाल धारण कर दिए दर्शन
उज्जैन, 03 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुलने के बाद पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक-पूजन किया गया।
भस्म आरती से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म अर्पित की गई। इसके बाद बाबा महाकाल का भांग और चंदन से श्रृंगार कर विभिन्न आभूषण अर्पित किए गए।
रजत मुकुट, मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला से श्रृंगार
बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला धारण कराई गई। मस्तक पर त्रिपुंड और त्रिशूल के साथ डमरू सुशोभित किया गया। भगवान को रजत ॐ, बिल्वपत्र और सुगंधित पुष्पों की मालाएं भी अर्पित की गईं। विशेष श्रृंगार में बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं को आकर्षित करता रहा। भस्म आरती से पहले भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय का पूजन किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल को फलों और मिष्ठान का भोग लगाया गया। नैवेद्य अर्पित करने के बाद आरती संपन्न हुई।
महा निर्वाणी अखाड़े ने अर्पित की भस्म
भस्म आरती के दौरान महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए।
दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कहीं। मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंजता रहा।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे