मध्य प्रदेश में सितंबर के आखिरी सप्ताह में फिर तेज बारिश के आसार, अगले 4 दिन 45 जिलों में बरसेगा पानी

 




भोपाल, 20 सितम्बर (हि.स.) । दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई से पहले मध्य प्रदेश में एक बार फिर बारिश का दौर तेज हो सकता है। उत्तर अंडमान सागर में बन रहा निम्न दाब क्षेत्र प्रदेश के मौसम को प्रभावित कर सकता है। अगले चार दिन भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर समेत कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। हालांकि 23 सितंबर तक प्रदेश में भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं है, लेकिन नए सिस्टम की दिशा और ताकत के आधार पर मौसम के पूर्वानुमान में बदलाव हो सकता है।

मौसम विभाग के मुताबिक, नए सिस्टम की वास्तविक स्थिति उसके मजबूत होने और आगे बढ़ने की दिशा पर निर्भर करेगी। यदि सिस्टम ज्यादा सक्रिय रहा तो सितंबर के आखिरी सप्ताह में प्रदेश में बारिश का एक और अच्छा दौर देखने को मिल सकता है। शनिवार को भोपाल और आसपास के इलाकों में रातभर बारिश के बाद भदभदा डैम का एक और कलियासोत डैम के दो गेट खोलने पड़े। लगातार पानी की आवक को देखते हुए बांधों से पानी छोड़ा गया।

इधर, ब्यावरा में लगातार बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर आ गए। अजनार नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने लगा, जिससे आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। आगर जिले में भी कई स्थानों पर तेज बारिश हुई। शनिवार को प्रदेश के 45 जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई। इनमें शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, सतना, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, पांढुर्णा, भोपाल, राजगढ़, सीहोर, विदिशा, रायसेन, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, उज्जैन, देवास, रतलाम, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, इंदौर, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खंडवा, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, श्योपुर, सागर और दमोह शामिल हैं।

सबसे ज्यादा बारिश विदिशा के लटेरी में 4.2 इंच दर्ज की गई। इसके अलावा गुना के कुंभराज में 4 इंच, आगर-मालवा के नलखेड़ा में 92 मिमी यानी 3.7 इंच, आगर के बड़ौद में 2.9 इंच, गुना के राघौगढ़ में 2.8 इंच और राजगढ़ के खिलचीपुर में ढाई इंच बारिश हुई।

पूरे मानसूनी सीजन की बात करें तो प्रदेश के पूर्वी हिस्से में आने वाले जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में करीब 1 प्रतिशत तक बारिश कम हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 प्रतिशत से 24 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज हुई है। हालांकि पिछले एक सप्ताह में बारिश का आंकड़ा तेजी से सुधरा है। कई जिलों में नदी-नालों के उफान पर आने से बाढ़ जैसे हालात भी बने। सीजन में पहली बार पूर्वी मध्य प्रदेश का बारिश का आंकड़ा बेहतर स्थिति में आया था, लेकिन शनिवार तक यह फिर 2 प्रतिशत कम हो गया।

पश्चिमी हिस्से में बारिश की कमी ज्यादा है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 5 प्रतिशत से 48 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। इनमें सबसे ज्यादा कमी वाले जिलों में आलीराजपुर समेत कुछ जिलों में मानसून की भरपाई के लिए अब आने वाली बारिश महत्वपूर्ण रहेगी।

मानसून के दौरान प्रदेश के 23 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं। अब उत्तर अंडमान सागर में बन रहे नए सिस्टम पर मौसम विभाग की नजर है। इसकी दिशा और तीव्रता अगले कुछ दिनों में तय करेगी कि मानसून की विदाई से पहले मध्य प्रदेश में बारिश का यह दौर कितना प्रभावी रहता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत