मध्य प्रदेश में फिर मौसम ने बदली करवट, आज बालाघाट-डिंडौरी में भारी बारिश का अलर्ट
- अब तक सामान्य से 13% कम बरसा मानसून
भोपाल, 17 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश में करीब 9 दिन के अंतराल के बाद एक बार फिर भारी बारिश की संभावना बनी है। मौसम विभाग ने आज शुक्रवार को बालाघाट और डिंडौरी जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा प्रदेश के 31 जिलों में गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में एक नया निम्न दबाव क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) सक्रिय हो रहा है। इसके साथ ही प्रदेश के ऊपर तीन चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) भी प्रभावी हैं। इन मौसम प्रणालियों के कारण आगामी दिनों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। 19 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में एक पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) भी सक्रिय होगा। इसके प्रभाव से प्रदेश में बारिश का सिलसिला दोबारा रफ्तार पकड़ सकता है और कई इलाकों में अच्छी बारिश होने की संभावना है।
गौरतलब है कि पिछले नौ दिनों से प्रदेश में कहीं भी व्यापक स्तर पर भारी बारिश दर्ज नहीं हुई है। इसका असर मानसूनी आंकड़ों पर भी दिखाई दिया है। अब तक मध्य प्रदेश में 243.3 मिमी (9.6 इंच) वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य औसत 281.3 मिमी (11.1 इंच) होना चाहिए था। यानी प्रदेश में अब तक सामान्य से 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में वर्षा की कमी 26 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में भी सामान्य से 2 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।
इन जिलों में बारिश की संभावना
बालाघाट और डिंडौरी में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं आलीराजपुर, धार, बड़वानी, इंदौर, खरगोन, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, बैतूल, नर्मदापुरम, रायसेन, सागर, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, दमोह, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, भिंड, दतिया, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, जबलपुर, सिवनी, मंडला, अनूपपुर और उमरिया में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। वहीं, ग्वालियर, भोपाल, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम और झाबुआ में गर्मी और उमस का असर बने रहने की संभावना है।
मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल प्रदेश में मानसून की स्थिति संतोषजनक है, लेकिन वर्षा की कमी कृषि और जल संसाधनों के लिहाज से चिंता का विषय बनी हुई है। आगामी निम्न दबाव क्षेत्र की दिशा और उसकी तीव्रता यह तय करेगी कि मानसून कितनी तेजी से सक्रिय होता है। यदि मौसम प्रणालियां अनुकूल रहीं तो जुलाई के दूसरे पखवाड़े में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत