मध्य प्रदेश में मानसून 10 दिन लेट, जून में 39% कम बारिश, किसानों की बढ़ी चिंता
भोपाल, 19 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। सामान्यतः 15-16 जून तक प्रदेश में दस्तक देने वाला मानसून इस बार करीब 10 दिन की देरी से 25 जून के आसपास पहुंचने की संभावना है। मानसून की इस लेटलतीफी का सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ रहा है। जून माह में अब तक प्रदेश में सामान्य से 39 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। वहीं मौसम विभाग ने शुक्रवार को प्रदेश के 39 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है।
मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, 1 जून से अब तक प्रदेश में औसत से 39 फीसदी कम वर्षा हुई है। सबसे ज्यादा असर पूर्वी मध्य प्रदेश में देखने को मिल रहा है, जहां बारिश की कमी के कारण खेतों में नमी नहीं बन पा रही है। इससे खरीफ सीजन की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। कम बारिश के चलते सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर जैसी खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है। शाजापुर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस.एस. धाकड़ ने किसानों को सलाह दी है कि पर्याप्त वर्षा होने तक बुवाई न करें।
उन्होंने बताया कि फसलों की सफल बुवाई के लिए खेत में पर्याप्त नमी जरूरी है, जिसके लिए कम से कम 100 मिमी (4 इंच) बारिश आवश्यक है। जिन क्षेत्रों में किसानों ने जल्दबाजी में सोयाबीन की बुवाई कर दी है, वहां बीज खराब होने और दोबारा बुवाई की नौबत आने का खतरा है।
39 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट
मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के मुताबिक प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन और तीन ट्रफ लाइनों के प्रभाव से आंधी-बारिश का दौर बना हुआ है। शुक्रवार को भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, नीमच, मंदसौर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, गुना, शिवपुरी, दतिया, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी, पांढुर्णा, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी समेत 39 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है।
इन जिलों में बनी रहेगी गर्मी
वहीं सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार, अलीराजपुर और झाबुआ जिलों में उमस और गर्मी का असर बना रह सकता है।
मानसून की देरी से कृषि अर्थव्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले एक सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा प्रभावित हो सकता है। इससे उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों पर असर पड़ने की आशंका है। किसान फिलहाल आसमान की ओर टकटकी लगाए मानसून का इंतजार कर रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे