मध्य प्रदेश में 600 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितता पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा, सीबीआई जांच की मांग

 


भोपाल, 26 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश में सरकारी भुगतान और बजट प्रबंधन से जुड़ी करीब 600 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने बुधवार को कहा कि मामला केवल कुछ कर्मचारियों की कथित लापरवाही तक सीमित नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि इससे प्रदेश की बजटीय, डिजिटल भुगतान और वित्तीय निगरानी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होते हैं।

मुकेश नायक ने कहा कि यदि सरकारी धन के भुगतान से जुड़े बैंक खातों में बदलाव कर राशि निजी खातों तक पहुंची है, तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने और जिम्मेदारी उच्च स्तर तक तय करने की मांग की। कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग भी रखी।

59 विभागों तक जांच पहुंचने का दावा

मुकेश नायक ने कहा कि प्रारंभिक तौर पर 24 विभागों से जुड़े मामलों की जानकारी सामने आई थी, जबकि बाद में 59 विभागों में अनियमितताओं की बात सामने आई। उन्होंने करीब 400 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि यदि ये आंकड़े जांच में सही पाए जाते हैं तो मामले की व्यापकता को देखते हुए इसकी तह तक जाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि जांच का दायरा केवल उन कर्मचारियों तक सीमित नहीं होना चाहिए, जिनके स्तर पर भुगतान या डिजिटल प्रक्रिया में कथित अनियमितता हुई। यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि बैंक खातों, लॉगिन और पासवर्ड में बदलाव की निगरानी किस स्तर पर होती थी और करोड़ों रुपए के संदिग्ध भुगतान वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था से कैसे गुजर गए।

निजी खातों में राशि पहुंचने के आरोप पर सवाल

कांग्रेस मीडिया प्रभारी नायक ने सरकारी धन के कथित रूप से निजी बैंक खातों में ट्रांसफर होने को गंभीर जांच का विषय बताया। उन्होंने लगभग 55 करोड़ रुपए के निजी खातों में पहुंचने की बात का उल्लेख करते हुए सरकार से खाताधारकों, लेनदेन और राशि की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने करीब 305 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेनदेन का भी हवाला दिया और पूछा कि यह राशि किन खातों में गई, भुगतान किस स्तर पर स्वीकृत हुए और संबंधित बैंक खातों में बदलाव किस प्रक्रिया के तहत किया गया।

कांग्रेस ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की

संदिग्ध राशि किन-किन खातों में पहुंची?

खाताधारकों की पहचान और उनके लेनदेन की जांच हुई या नहीं?

बैंक खातों में बदलाव की अनुमति किस स्तर पर दी गई?

डिजिटल सिस्टम के लॉगिन और पासवर्ड की निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी?

संदिग्ध भुगतान किस स्तर से स्वीकृत हुए?

ऑडिट और वित्तीय नियंत्रण व्यवस्था ने इन लेनदेन को समय रहते क्यों नहीं पकड़ा?

बजट प्रक्रिया को लेकर भी उठाए सवाल

मुकेश नायक ने कहा कि सरकारी योजनाओं के लिए बजट निर्माण और राशि आवंटन की निर्धारित प्रक्रिया होती है। योजना तैयार होने से लेकर प्रशासनिक स्वीकृति, वित्तीय प्रावधान, विभागीय स्तर पर परीक्षण और विधानसभा में बजट प्रस्तुत किए जाने तक कई स्तरों पर जांच और अनुमोदन की व्यवस्था रहती है।

उन्होंने सवाल किया कि यदि कथित अनियमितताएं बजट और भुगतान प्रणाली से जुड़ी हैं तो निर्धारित प्रक्रिया का पालन किस स्तर पर हुआ और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को कब मिली।

रिकवरी के आंकड़ों का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग

मुकेश नायक ने सरकार की ओर से कथित रूप से करीब 380 करोड़ रुपए की गड़बड़ी में से 220 करोड़ रुपए की रिकवरी किए जाने के दावे का उल्लेख करते हुए पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को विभागवार और तारीखवार यह बताना चाहिए कि कितनी राशि की रिकवरी हुई, किस खाते या व्यक्ति से कितनी रकम वापस आई और कितनी राशि अभी शेष है।

उन्होंने कहा कि केवल कुल रिकवरी का आंकड़ा बताने के बजाय पूरी प्रक्रिया का विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।

सरकारी धन से संपत्ति खरीदी तो हो जांच

कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि सरकारी धन निजी खातों में ट्रांसफर हुआ और उससे जमीन, मकान, वाहन या अन्य संपत्तियां खरीदी गईं, तो संबंधित लेनदेन की भी जांच होनी चाहिए। सरकारी धन से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग उन्होंने की।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग

मुकेश नायक ने कहा कि मामले की व्यापकता को देखते हुए केवल विभागीय स्तर की जांच पर्याप्त नहीं होगी। कांग्रेस की मांग है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराई जाए और इसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश के स्तर से हो। उन्होंने कहा कि जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि संदिग्ध भुगतान किसने किए, सिस्टम और बैंक खातों में बदलाव किसने किए, पासवर्ड किस स्तर पर बदले गए, राशि किन खातों में पहुंची और पूरी प्रक्रिया में किसकी भूमिका रही।

मुकेश नायक ने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य किसी निर्दोष कर्मचारी को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सरकारी धन की जवाबदेही तय कराना है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में बड़े अधिकारियों या अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब

कांग्रेस ने सरकार से मामले की समयसीमा, विभागवार जांच, दर्ज एफआईआर, रिकवरी और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। नायक ने कहा कि सरकारी खजाने से जुड़े मामले में जनता को स्पष्ट और दस्तावेजी जानकारी मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच में गंभीर अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो जिम्मेदारी तय होने तक कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर उठाती रहेगी। वार्ता के दौरान पूर्व प्रवक्ता स्वदेश शर्मा, अवनीश बुंदेला, विक्रम चौधरी, अभिनव बरोलिया, कुंदन पंजाबी और राहुल राज सहित कांग्रेस नेता मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे