उमरिया: भूमि विवाद में थाने के बाहर धरने पर बैठे ग्रामीण, कंपनी कर्मचारियों पर एफआईआर की मांग

 


उमरिया, 3 अक्टूबर (हि.स.)। मध्‍य प्रदेश के उमरिया जिले के पाली थाना क्षेत्र के ग्राम गिठौरी में भूमि विवाद को लेकर ग्रामीणों और बजरंग पावर इस्पात लिमिटेड, पिथौरा वेस्ट से जुड़े कर्मचारियों के बीच विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने कंपनी कर्मचारियों पर घर में जबरन घुसने, महिलाओं और परिजनों के साथ अभद्रता, गाली-गलौज, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने तथा धमकी देने के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने पाली थाना प्रभारी को लिखित शिकायत देकर संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। कार्रवाई की मांग को लेकर शिकायतकर्ता पक्ष के लोग थाने के बाहर धरने पर बैठ गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी शिकायत पर पुलिस मामला दर्ज कर जांच शुरू नहीं करती, तब तक धरना जारी रहेगा। शिकायत में कंपनी से जुड़े शशिधर द्विवेदी, श्याम हरदा, एसके गुप्ता, सौरभ मिश्रा, भंगा साहू, विजय यादव, शिवम शर्मा, शक्ति प्रताप सिंह, दीपेंद्र यादव और कमलेश कुमार रैदास सहित अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

न्यायालय में लंबित है भूमि विवाद

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम गिठौरी की संबंधित भूमि को लेकर वन विभाग द्वारा कथित रूप से कब्जा किए जाने के प्रयास के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया था। इस संबंध में न्यायालयीन प्रकरण आरसीएस ए-32/25 बाबूलाल बनाम शासन न्यायालय में विचाराधीन बताया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि भूमि विवाद से जुड़ा मामला न्यायालय में लंबित होने के बावजूद कंपनी से जुड़े कर्मचारी उनके घरों में पहुंचे।

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों ने घर में प्रवेश कर उनके और परिवार के सदस्यों के साथ अभद्र व्यवहार किया। महिलाओं के साथ भी कथित रूप से अभद्रता और गाली-गलौज की गई। ग्रामीणों का कहना है कि महिलाओं के चिल्लाने के बाद कंपनी कर्मचारी वहां से जाने लगे, लेकिन कथित तौर पर कांटेदार तार में फंस गए। इसके बाद कंपनी कर्मचारियों की ओर से थाने में करीब 25 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने इससे पहले भी अपनी शिकायतों को लेकर कई बार पुलिस थाने में आवेदन दिए, लेकिन उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं की गई। इसी को लेकर अब उन्होंने थाने में धरना शुरू किया है।

घर का सामान अस्त-व्यस्त करने और धमकी देने का आरोप

शिकायत में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि घर में प्रवेश के दौरान महिलाओं और अन्य परिजनों के साथ गाली-गलौज की गई तथा घर का सामान अस्त-व्यस्त कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं ने जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया है। इसके अलावा गलत तरीके से छूने और धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक उन्हें कथित तौर पर यह धमकी भी दी गई कि दस दिनों के भीतर उनके घर तोड़ दिए जाएंगे। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्हें यह भी कहा गया कि वे जो करना चाहें कर लें, उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा। इन आरोपों के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है और वे पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

एफआईआर दर्ज होने तक धरना जारी रखने की बात

शिकायत के बाद ग्रामीण पाली थाने में धरने पर बैठ गए। उनका कहना है कि उनकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर आरोपों की जांच शुरू होने तक वे धरने से नहीं उठेंगे। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

मामला एक ओर न्यायालय में विचाराधीन भूमि विवाद से जुड़ा है, वहीं दूसरी ओर कंपनी कर्मचारियों पर लगाए गए कथित गाली-गलौज, जातिसूचक टिप्पणी, अभद्रता और धमकी के आरोपों के कारण विवाद और गंभीर हो गया है। अब पुलिस की जांच और दोनों पक्षों के कथनों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर नजर है।

एसडीओपी बोले- उच्च अधिकारियों से चर्चा के बाद होगी कार्रवाई

पाली के एसडीओपी ललित गठरे ने बताया कि ग्राम गिठौरी के ग्रामीण थाने में बैठे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने आज ही पाली का प्रभार संभाला है और ग्रामीणों की बातें सुनी गई हैं। मामले को लेकर उच्च अधिकारियों से चर्चा की जा रही है। अधिकारियों से मिलने वाले निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि आदिवासी परिवारों से जुड़े मामले में उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई, जबकि दूसरी ओर कंपनी की ओर से ग्रामीणों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है। उनका कहना है कि आदिवासियों के विस्थापन से पहले निर्धारित शर्तों और प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कर उन्हें न्याय दिलाने की मांग की है।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्‍द्र त्रिपाठी