हर ग्राम में बनेगी ‘लखपति गोपालक दीदी’, पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र को बनायेंगे आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार
कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने ली संभागीय समीक्षा बैठक
भोपाल, 08 जून (हि.स.)। कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पशुपालन को केवल सहायक व्यवसाय न मानकर ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बनाएं। प्रत्येक ग्राम में कम से कम एक लखपति गोपालक दीदी तैयार करने का लक्ष्य लेकर कार्य करें। महिला स्व-सहायता समूहों को पशुपालन गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के प्रयास किए जाएं, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।
पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त आधार बनाने के उद्देश्य से कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल की अध्यक्षता में पशुपालन, डेयरी एवं मछुआ कल्याण विभाग की संयुक्त संभागीय समीक्षा बैठक सोमवार को इंदौर में आयोजित की गई। बैठक में प्रमुख सचिव पशुपालन उमाकांत उमराव, सचिव मत्स्य पालन स्वतंत्र कुमार सिंह, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा सहित संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
दुग्ध व्यवसाय को संगठित रूप दें
क्षीरधारा ग्राम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए आयुक्त बर्णवाल ने कहा कि इस योजना के माध्यम से गांवों में दुग्ध उत्पादन और दुग्ध व्यवसाय को संगठित स्वरूप प्रदान किया जाए। दुग्ध उत्पादकों को आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक पशुपालन और बेहतर विपणन सुविधाओं से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के प्रयास किए जाएं। बर्णवाल ने हिरण्यगर्भ नस्ल सुधार अभियान को परिणाममूलक ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्नत नस्ल के पशुओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर नस्ल सुधार कार्यक्रम चलाए जाएं। कृत्रिम गर्भाधान और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाकर पशुओं की उत्पादकता में वृद्धि सुनिश्चित की जाए। पशुपालकों को संतुलित एवं पौष्टिक पशु आहार की जानकारी और उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। संतुलित आहार से पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा तथा दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पशु पोषण संबंधी जागरूकता अभियान भी चलाए जाएं।
प्रमुख सचिव पशुपालन उमाकांत उमराव ने प्रदेश को उन्नत नस्ल के पशुओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई पशुपालकों को उच्च गुणवत्ता वाली नस्ल के पशुओं के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। यदि प्रदेश में ही उन्नत नस्ल के पशुओं का पर्याप्त उत्पादन होगा तो पशुपालकों को कम लागत पर स्थानीय स्तर पर बेहतर नस्ल के पशु उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। बैठक में ब्रीडर संघों के गठन पर भी चर्चा हुई।
आयुक्त बर्णवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पशु प्रजनन से जुड़े किसानों और उद्यमियों को संगठित कर ब्रीडर संघों का गठन किया जाए, जिससे गुणवत्तापूर्ण नस्ल विकास कार्यक्रमों को गति मिल सके। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए कहा कि योजना का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समयबद्ध रूप से पहुंचे। इसके माध्यम से पशुपालकों को स्वरोजगार और आयवृद्धि के नए अवसर उपलब्ध कराए जाएं। बैठक में गोशालाओं की स्थिति और संचालन की भी समीक्षा की गई।
बर्णवाल ने निर्देश दिए कि गोशालाओं को आधुनिक, उन्नत और आत्मनिर्भर बनाया जाए। गोशालाओं में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि गोशालाएं केवल पशु संरक्षण का केंद्र न रहकर जैविक खेती, गोबर गैस, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य आयवर्धक गतिविधियों का भी केंद्र बनें। उन्होंने दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने को विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल करने के निर्देश दिए। इसके लिए बेहतर नस्ल, गुणवत्तापूर्ण चारा, संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और आधुनिक पशुपालन पद्धतियों को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।
मछुआ कल्याण एवं मत्स्य पालन विभाग की गतिविधियों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जलाशयों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों का अधिकतम उपयोग कर मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं। मत्स्य पालन को ग्रामीण रोजगार और आय का महत्वपूर्ण साधन बनाते हुए उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाए। श्री बर्णवाल ने मत्स्य पालन में केज कल्चर (केज पद्धति) को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जलाशयों में वैज्ञानिक पद्धति से केज स्थापित कर कम क्षेत्र में अधिक मत्स्य उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इससे मछुआरों की आय में वृद्धि होगी और प्रदेश के मत्स्य उत्पादन को नई गति मिलेगी। बैठक में पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन से संबंधित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध, परिणाममूलक और जनहितकारी कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
इसके साथ ही कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि इन क्षेत्रों के विकास से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और किसानों तथा पशुपालकों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे