जबलपुरः एमएसपी की गारंटी को लेकर सड़कों पर उतरे किसान, ट्रैक्टर रैली निकाल कलेक्ट्रेट पहुंचे

 


जबलपुर, 15 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के जबलपुर में धान-गेहूं की एमएसपी पर खरीदी समेत 15 सूत्रीय मांगों को लेकर मंगलवार को सैकड़ों किसानों ने मोर्चा खोल दिया। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष रामदास पटेल के नेतृत्व में किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली और जिला मुख्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। किसानों ने साफ कहा कि उन्हें भावांतर योजना नहीं, बल्कि घोषित एमएसपी पर फसल खरीदी की गारंटी चाहिए।

प्रदर्शन के बाद किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को 15 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। किसानों का आरोप था कि मंडियां किसानों के हित में काम करने के बजाय शोषण का माध्यम बनती जा रही हैं। उन्होंने धान की खरीदी 3100 रुपए और गेहूं की 2700 रुपए प्रति क्विंटल की दर से करने तथा प्रति एकड़ खरीदी की सीमा 25 क्विंटल निर्धारित करने की मांग की।

किसानों ने मझौली तहसील में धान, गेहूं और मूंग की बकाया राशि का तत्काल भुगतान करने के साथ पनागर तहसील के विभिन्न वेयरहाउसों में अटकी भुगतान राशि जारी करने की मांग रखी। मंडियों में समर्थन मूल्य से कम पर लगने वाली बोलियों पर रोक लगाने की भी मांग की गई।

किसानों ने व्यापारियों द्वारा उपज खरीदने के बाद भुगतान नहीं करने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की।

किसानों ने मझौली के रानीताल कटाव सबस्टेशन का निर्माण जल्द पूरा कर कृषि कार्यों के लिए प्रतिदिन 12 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की मांग की। सिहोरा क्षेत्र में ओवरलोडेड ट्रांसफार्मरों को बदलने और नकली हाइब्रिड बीज बेचने वाली कंपनियों की जांच कर कार्रवाई करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।

किसानों ने कहा कि जब तक पराली निपटाने के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जाते, तब तक पराली जलाने को लेकर किसानों पर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। इसके अलावा ‘किसान खेत सड़क योजना’ तत्काल शुरू करने की मांग भी उठाई गई।

किसानों ने मंडियों में फर्जीवाड़ा और बिचौलियों के हस्तक्षेप पर रोक लगाने के लिए आधार कार्ड और फोटो स्कैन की व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि इससे वास्तविक किसान की पहचान सुनिश्चित होगी और फसल खरीदी में होने वाली गड़बड़ियों पर अंकुश लगाया जा सकेगा।

किसानों ने चेतावनी दी कि फसल भुगतान, बिजली आपूर्ति, मंडी व्यवस्था और राजस्व से जुड़ी समस्याओं का समय रहते निराकरण नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक