रेत स्टॉक में भारी गड़बड़ी, कटनी कलेक्टर न्यायालय ने लगाया 27.44 करोड़ का जुर्माना

 


कटनी, 5 सितंबर (हि.स.)। मध्‍य प्रदेश के कटनी जिले में रेत के भंडारण और परिवहन से जुड़े एक मामले में कलेक्टर न्यायालय ने बड़ी कार्रवाई की है। सेंड पोर्टल पर दर्ज रेत के स्टॉक और मौके पर उपलब्ध वास्तविक मात्रा में भारी अंतर मिलने पर मेसर्स विस्टा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड पर 27 करोड़ 44 लाख 29 हजार 650 रुपये का जुर्माना लगाया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी आशीष तिवारी ने फर्म को निर्धारित राशि जमा कराने के निर्देश दिए हैं।

यह कार्रवाई मध्यप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भंडारण का निवारण) नियम, 2022 के नियम 19 के तहत की गई। जांच के दौरान पोर्टल पर दर्ज स्टॉक और भौतिक रूप से उपलब्ध रेत के बीच 1 लाख 46 हजार 362 घनमीटर का अंतर पाया गया।

दरअसल, जिले में स्वीकृत खनिज रेत भंडारण अनुज्ञप्ति स्थलों पर 30 सितंबर 2023 की रात 12 बजे सेंड पोर्टल पर दर्ज शेष स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराया गया था। इसी दौरान तहसील विजयराघवगढ़ के ग्राम पुरैनी में खसरा क्रमांक 43/1, 43/2 और 43/3 की कुल 1.320 हेक्टेयर भूमि पर संचालित मेसर्स विस्टा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड के खनिज व्यापारिक अनुज्ञप्ति स्थल का निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण दल को मौके पर करीब 100 घनमीटर रेत ही मिली, जबकि सेंड पोर्टल पर इसी स्थल के लिए 1 लाख 46 हजार 462 घनमीटर रेत का स्टॉक दर्ज था। इस तरह सरकारी पोर्टल पर दर्ज मात्रा और वास्तविक भंडारण में 1 लाख 46 हजार 362 घनमीटर का अंतर सामने आया।

इतनी बड़ी मात्रा में रेत के अंतर को लेकर फर्म से यह स्पष्ट करने के लिए वैध विक्रय, परिवहन अथवा अन्य संबंधित दस्तावेज मांगे गए कि रेत किस आधार पर भंडारण स्थल से बाहर गई। हालांकि, फर्म ऐसा समुचित एवं विश्वसनीय अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सकी, जिससे इतनी बड़ी मात्रा में रेत के भंडारण स्थल से बाहर जाने को वैध साबित किया जा सके।

बिना अभिवहन पास परिवहन की आशंका

संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्म, मध्यप्रदेश द्वारा 3 जनवरी 2024 को जारी पत्र में भी ऐसी स्थिति को लेकर स्पष्ट किया गया है। इसके अनुसार यदि सेंड पोर्टल पर रेत का स्टॉक उपलब्ध दर्ज हो, लेकिन स्वीकृत भंडारण स्थल पर वास्तविक मात्रा उपलब्ध नहीं हो अथवा दर्ज स्टॉक से कम मिले, तो भंडारण स्थल से रेत बिना अभिवहन पास के बाहर भेजे जाने की संभावना मानी जा सकती है।

प्रकरण की सुनवाई के दौरान कलेक्टर न्यायालय ने विभागीय प्रतिवेदन, स्थल निरीक्षण पंचनामा, शासन साक्षी के कथन और प्रतिपरीक्षण सहित उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण किया। फर्म की ओर से जांच में तकनीकी और प्रक्रियागत खामियों का उल्लेख करते हुए अपना पक्ष रखा गया, लेकिन न्यायालय ने माना कि ये तर्क पोर्टल और मौके पर मिले स्टॉक के बीच 1 लाख 46 हजार 362 घनमीटर के अंतर को स्पष्ट नहीं करते।

न्यायालय ने कहा कि यदि इतनी बड़ी मात्रा में रेत का वैध विक्रय या परिवहन किया गया था तो उसके समर्थन में परिवहन दस्तावेज, अभिलेख और अन्य आवश्यक वैधानिक प्रमाण प्रस्तुत किए जाने चाहिए थे। फर्म ऐसा संतोषजनक प्रमाण प्रस्तुत करने में असफल रही।

रॉयल्टी का 15 गुना लगा जुर्माना

सभी तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद कलेक्टर न्यायालय ने 1 लाख 46 हजार 362 घनमीटर रेत का स्टॉक अंतर स्थापित माना। संबंधित फर्म को उक्त मात्रा के रेत के अवैध परिवहन का दोषी मानते हुए नियम 19 के तहत शास्ति निर्धारित की गई।

आदेश के मुताबिक इस मात्रा की निर्धारित रॉयल्टी 1 करोड़ 83 लाख 95 हजार 310 रुपये बनती है। नियम के तहत रॉयल्टी की 15 गुना राशि के रूप में 27 करोड़ 44 लाख 29 हजार 650 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

कलेक्टर न्यायालय ने मेसर्स विस्टा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड, आनंद बिहार कॉलोनी, कटनी को यह राशि जमा कराने के निर्देश दिए हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / राकेश चतुर्वेदी