राजगढ़ःजिले में शनैश्चरी अमावस्या और शनि जयंती पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

 


राजगढ़, 16 मई (हि.स.)। मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में शनिवार को शनि जयंती और शनैश्चरी अमावस्या के दुर्लभ संयोग पर श्रद्धा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। ब्यावरा, खिलचीपुर, सारंगपुर, पचोर सहित पूरे जिले में स्थित शनि मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगना शुरू हो गईं, जो देर रात तक जारी रहीं। ब्यावरा शहर के ढकोरा रोड स्थित शनि मंदिर में विशेष पूजा- अर्चना की गई। भक्तों ने सरसों का तेल, नारियल, काली उड़द, दीपक, फूलमालाएं और प्रसाद अर्पित कर शनि देव के दर्शन किए। मंदिर परिसर जय शनिदेव के जयकारों और घंटियों की आवाज से गूंजता रहा।

जूना ब्यावरा स्थित प्राचीन शनि मंदिर और एसडीएम कार्यालय के समीप शनि मंदिर में भी दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा। खिलचीपुर स्थित नाहरदा परिसर के प्राचीन शनि मंदिर में न केवल जिले के विभिन्न गांवों और कस्बों से बल्कि राजस्थान एवं आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर समिति द्वारा शनि देव का चांदी के आभूषणों से विशेष शृंगार किया गया, जिसने भक्तों का मन मोह लिया। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-शांति, व्यापार में उन्नति और शनि दोष से मुक्ति की कामना करते हुए पूजा-अर्चना की। सारंगपुर में भी शनैश्चरी अमावस्या के अवसर पर कपिलेश्वर घाट पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर दान-पुण्य किया। सूर्योदय के साथ ही कपिल तीर्थ घाट पर धार्मिक अनुष्ठान शुरू हुए। भक्तों ने कालीसिंध नदी में आस्था की डुबकी लगाकर भगवान कपिलेश्वर के दर्शन किए और परिवार की समृद्धि की कामना की। पचोर स्थित शनि मंदिर में भी दिनभर विशाल भीड़ उमड़ी रही। श्रद्धालुओं ने तिल और सरसों का तेल अर्पित कर शनि देव की पूजा की। मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसादी का आनंद लिया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि जयंती और शनैश्चरी अमावस्या एक ही दिन पड़ने का यह संयोग अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी कारण पूरे जिले में इस पावन पर्व को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह और भक्ति भावना देखने को मिली।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनोज पाठक