जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों में अंतर पर जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, व्यापक मूल्य-नियंत्रण की मांग

 


भोपाल, 23 सितंबर (हि.स.)। जीवनरक्षक और आवश्यक दवाओं की कीमतों में अंतर का मुद्दा अब राजनीतिक स्तर पर भी उठाया गया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बुधवार काे राष्ट्रपति को पत्र लिखकर दवाओं की कीमतों में असामान्य अंतर की समीक्षा और प्रभावी मूल्य-नियंत्रण व्यवस्था लागू करने की मांग की है। पटवारी ने यह पत्र ऐसे समय लिखा है, जब सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर को आवश्यक कैंसर दवाओं के प्राइज टू रिटेलर (पीटीआर) और मैक्सिमम रिटेल प्राइज (एमआरपी) के बीच बड़े अंतर पर चिंता जताई थी।

जीतू पटवारी ने पत्र में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का हवाला देते हुए कहा कि अदालत के समक्ष एक आवश्यक कैंसर दवा का पीटीआर 2,700 रुपए और एमआरपी 27,000 रुपए होने का उदाहरण रखा गया। यानी दोनों कीमतों के बीच करीब दस गुना अंतर है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस तरह के मूल्य अंतर पर सवाल उठाते हुए दवा मूल्य निर्धारण और नियामकीय व्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त की थी।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह मामला केवल किसी एक दवा तक सीमित नहीं है, बल्कि गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमत तय करने की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा से जुड़ा है। उन्होंने केंद्र से यह स्पष्ट करने की मांग की कि जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों में अत्यधिक अंतर को रोकने के लिए मौजूदा नियमों के तहत क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

पटवारी ने अपने पत्र में ड्रग्स (प्राइज कंट्राेल) आर्डर, 2013 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत निर्धारित दवाओं के लिए Ceiling प्राइज तय करने की व्यवस्था है। उन्होंने सरकार से मांग की कि कैंसर सहित गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली आवश्यक दवाओं की मूल्य-नियंत्रण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाए और जहां जरूरी हो, उपलब्ध नियामकीय प्रावधानों का इस्तेमाल किया जाए।

उन्होंने प्राइजटूरिटेलर, प्राइजटूस्टाॅकिस्ट और एमआरपी के बीच असामान्य अंतर वाली दवाओं की पहचान कर उनकी जांच कराने तथा दवाओं की कीमत और व्यापारिक मार्जिन से जुड़ी जानकारी को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग भी की। इसके साथ ही सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत खरीदी और दवा के भुगतान की व्यवस्था की भी समीक्षा की मांग की गई है।

आठ बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग

पटवारी ने राष्ट्रपति से केंद्र सरकार से इस मामले में तथ्यात्मक रिपोर्ट मंगाने, आवश्यक और जीवनरक्षक दवाओं की मौजूदा मूल्य-नियंत्रण व्यवस्था की समीक्षा कराने, जरूरत के अनुसार Ceiling प्राइज या रिटेल प्राइज निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू करने तथा अधिक मूल्य-अंतर वाली दवाओं की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मरीजों को दवाओं की कीमत, व्यापारिक मार्जिन और एमआरपी की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनाने की बात भी कही।

उन्होंने सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में दवाओं की खरीद और प्रतिपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा तथा आवश्यक एवं जीवनरक्षक दवाओं के लिए व्यापक मूल्य-नियंत्रण की दिशा में समयबद्ध नीति बनाने की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार की सुनवाई में भी इस मुद्दे पर केंद्र से जवाब मांगा था। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि सरकार का प्रयास दवाओं को सभी लोगों तक उचित कीमत पर पहुंचाना है और व्यवस्था में सुधार की गुंजाइश होने पर कदम उठाए जाएंगे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को निर्धारित की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे