सागर : बंजर जमीन उगल रही मुगलकालीन कीमती पत्थर, बटोरने उमड़ी ग्रामीणों की भारी भीड़

 


सागर, 17 जुलाई (हि.स.)। सागर जिले की केसली तहसील से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के ग्राम जैतपुर (डोमा) में इन दिनों एक बंजर भूमि अचानक ग्रामीणों के लिए 'कुबेर का खजाना' बन गई है। पिछले 15 दिनों से इस पथरीली और बंजर जमीन पर कीमती पत्थरों और प्राचीन माला के दानों को खोजने के लिए ग्रामीणों का हुजूम उमड़ रहा है।

हालत यह है कि सुबह होते ही ग्रामीण अपने घरों से महिलाओं और बच्चों के साथ हाथ में खुरपी, कुदाल और अन्य औजार लेकर जमीन की खुदाई करने निकल पड़ते हैं। हर कोई इस उम्मीद में मिट्टी छान रहा है कि शायद उसकी किस्मत भी चमक जाए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, खुदाई के दौरान अब तक करीब 10 ग्रामीणों को विभिन्न आकारों के बेहद खूबसूरत, चमकीले और कीमती दाने मिल चुके हैं। इन दानों की चमक और बनावट को देखते हुए इनकी कीमत 100 रूपासे लेकर ₹25,000 तक आंकी गई है।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन पत्थरों को बेचने के लिए ग्रामीणों को कहीं दूर नहीं जाना पड़ रहा है। मौके पर ही बड़े-बड़े खरीदार और जौहरी हैं। जैसे ही किसी ग्रामीण को कोई चमकीला पत्थर मिलता है, खरीदार उसकी गुणवत्ता के आधार पर मौके पर ही हाथों-हाथ नकद भुगतान कर उसे खरीद लेते हैं।

मौके पर मौजूद जानकारों और प्राचीन वस्तुओं के खरीदारों का मानना है कि जमीन से निकल रहे ये चमकीले दाने मुगलकालीन हो सकते हैं। प्राचीन समय में राजा-महाराजाओं और उच्च वर्ग के लोगों द्वारा इस तरह के कीमती पत्थरों का उपयोग कीमती मालाएं और आभूषण बनाने के लिए किया जाता था।

पहले भी मिल चुके हैं ऐसे दाने

स्थानीय लोगों के अनुसार, सागर जिले में इस तरह की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी देवरी तहसील के सिलारी और केसली के मदनपुर जैसे गांवों में इसी तरह के प्राचीन और कीमती दाने जमीन के नीचे से मिल चुके हैं।

वजह चाहे जो भी हो, लेकिन इस अनोखी खोज ने जैतपुर डोमा के ग्रामीणों की किस्मत बदल दी है। अमूमन बारिश के इस मौसम में जब खेतों में कृषि कार्य कम होता है और मजदूरों के पास रोजगार का संकट होता है, तब इस बंजर जमीन ने ग्रामीणों को अतिरिक्त आय का एक बड़ा जरिया दे दिया है। फिलहाल, क्षेत्र में यह कौतूहल का विषय बना हुआ है और प्रशासन की नजर भी इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे