जीवन में संस्कारों का होना जरूरी, घर परिवार संस्कारों पर ध्यान दे - मुनिश्री प्रत्यक्ष रत्न विजयजी
मंदसौर, 06 सितंबर (हि.स.)। वर्तमान समय में हमारे परिवार छोटे होते जा रहे हैं। पहले घर भले ही छोटे हो लेकिन परिवार बड़े होते थे। परिवार में बड़े बुजुर्ग युवाओं व बच्चों पर निगाह रखते थे, उनकी संस्कारों पर विशेष निगाह रहती थी। लेकिन वर्तमान समय में छोटे परिवार होने से संस्कारों की कमी देखने में आ रही है। हमारे घर बंगले भले ही बड़े हो गए हैं लेकिन छोटे परिवारों के प्रचलन के कारण युवा पीढ़ी व बच्चों में संस्कार देना चुनौती का कार्य हो गया है। माता-पिता संतान के संस्कारों पर विशेष ध्यान दें।
उक्त उद्गार परम पूज्य जैन संत मुनिराज प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा. ने रविवार को मध्य प्रदेश के मंदसौर में जीवगंज स्थित राजेन्द्र विलास में आयोजित धर्मसभा में कहे। उन्होंने धर्मसभा में कहा कि हमारा व्यवहार ही हमारे संस्कारों को प्रदर्शित करता है। लेकिन हमें अपना व्यवहार, आचरण अच्छा रखना चाहिए। जीवन में संस्कार नहीं है तो कुछ भी नहीं है। संस्कार से ही मनुष्य की पहचान होती है इसलिए जीवन में संस्कारों पर ध्यान दो।
परमात्मा की कृपा को समझो- मुनि श्री प्रत्यक्षरत्नजी ने कहा कि जीवन में हमें जो भी मिला परमात्मा की कृपा से ही मिला है। हमारी आत्मा को मनुष्य भव और भारत भूमि पर जन्म और उसमें भी जैन कुल का सानिध्य यह सब तीर्थंकर परमात्मा की कृपा से ही मिला है। जीवन में हमें सुख-दुख आते रहते हैं इनकी चिंता किये बगैर परमात्मा की कृपा को समझो तथा अपने जीवन को श्रेष्ठ कार्यों में लगाओ।
सद्गुरु, परमात्मा व आत्मा को प्रसन्न रखो -मुनि श्री ने कहा कि हरिभद्रसूरिस्वामी म.सा. ने सद्गुरु, परमात्मा व स्वयं की आत्मा की चिंता करने व उन्हें प्रसन्न रखने की बात कही है। परमात्मा के बाद सबसे महत्वपूर्ण कोई है तो सद्गुरु और उसके बाद हमारी स्वयं की आत्मा महत्वपूर्ण है। जीवन में इन तीनों को प्रसन्न रखने का प्रयास करो। धर्मसभा में मुनि श्री पवित्ररत्न विजयजी म.सा. ने भी विचार रखे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया