निवेश के दावों और बढ़ते कर्ज को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरा

 


भोपाल, 03 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में बढ़ते सरकारी कर्ज और ब्याज भुगतान को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर प्रदेश में बड़े निवेश और औद्योगिक विकास के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी खर्चों के लिए लगातार कर्ज लिया जा रहा है। पटवारी ने कहा कि सरकार को निवेश के दावों के साथ यह भी बताना चाहिए कि प्रदेश में कितना निवेश वास्तव में जमीन पर उतरा और उससे कितने लोगों को रोजगार मिला।

जीतू पटवारी ने मंगलवार काे मीडिया काे जारी अपने बयान में दावा किया कि वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से अक्टूबर के बीच प्रदेश सरकार करीब 44,980 करोड़ रुपए का नया कर्ज ले चुकी है। इसके अलावा 3 नवंबर को 4,000 करोड़ रुपए का एक और कर्ज लेने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि इसी अवधि में सरकार ने करीब 14,073 करोड़ रुपए ब्याज भुगतान और पुराने ऋण के पुनर्भुगतान पर खर्च किए हैं। उनके मुताबिक, लगातार बढ़ती ऋण देनदारियां प्रदेश की वित्तीय स्थिति के सामने चुनौती पेश कर रही हैं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बजट के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में ब्याज भुगतान के लिए करीब 33,735 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वहीं वेतन, पेंशन और ब्याज पर कुल प्रस्तावित खर्च लगभग 1,37,826 करोड़ रुपए है, जो अनुमानित राजस्व प्राप्तियों का करीब 45 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इन अनिवार्य खर्चों के बाद विकास कार्यों के लिए कितने संसाधन उपलब्ध रहेंगे।

पटवारी ने किसानों की फसल के उचित मूल्य, युवाओं के रोजगार, सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता, अस्पतालों में डॉक्टरों की नियुक्ति और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, सिंचाई व पेयजल जैसी सुविधाओं को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि इन बुनियादी जरूरतों के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

निवेश और रोजगार के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग

जीतू पटवारी ने कहा कि सरकार निवेश सम्मेलनों और उद्योगों से जुड़े समझौतों के जरिए प्रदेश में औद्योगिक विकास की तस्वीर पेश कर रही है। लेकिन निवेश प्रस्तावों और वास्तविक निवेश के बीच अंतर स्पष्ट होना चाहिए। सरकार को बताना चाहिए कि अब तक घोषित निवेश में से कितना धरातल पर उतरा, कितनी औद्योगिक इकाइयां शुरू हुईं और प्रदेश के युवाओं को कितने स्थायी रोजगार मिले। उन्होंने कहा कि केवल एमओयू और निवेश प्रस्तावों को उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उनके क्रियान्वयन और रोजगार सृजन की स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। छोटे व्यापारियों, लघु एवं मध्यम उद्योगों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए भी ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

सरकार से पूछे पांच सवाल

पीसीसी चीफ पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से पांच बिंदुओं पर जवाब मांगा है। इनमें अप्रैल से अक्टूबर के बीच करीब 44,980 करोड़ रुपए का कर्ज लेने के बावजूद अतिरिक्त कर्ज की जरूरत, ब्याज और ऋण पुनर्भुगतान के बाद विकास कार्यों के लिए उपलब्ध राशि, निवेश प्रस्तावों के वास्तविक क्रियान्वयन और उनसे मिले रोजगार का ब्योरा शामिल है। इसके अलावा किसानों, छोटे व्यापारियों और लघु उद्योगों को आर्थिक मजबूती देने की कार्ययोजना तथा बढ़ते कर्ज और ब्याज के बोझ को कम करने की दीर्घकालिक रणनीति भी स्पष्ट करने की मांग की है।

पटवारी ने कहा कि सरकार को यह भी बताना चाहिए कि लिए गए कर्ज से कितनी स्थायी परिसंपत्तियां तैयार हुईं और कितनी विकास परियोजनाएं पूरी की गईं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक प्रगति का आकलन केवल निवेश घोषणाओं से नहीं, बल्कि उद्योगों की स्थापना, रोजगार के अवसरों, किसानों की आय और आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार से होना चाहिए।

उन्होंने सरकार से कर्ज, ब्याज भुगतान, निवेश और रोजगार से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता को आर्थिक नीतियों और सरकारी खर्चों के संबंध में स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे