कटनी : अवैध वसूली मामले में सीएसपी नेहा पच्चीसिया के खिलाफ जांच तेज, शिकायत की जांच जबलपुर स्थानांतरित

 


कटनी, 31 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के कटनी में पदस्थ नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) नेहा पच्चीसिया के खिलाफ अवैध वसूली के आरोपों की जांच अब नए स्तर पर पहुंच गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) ने जांच कटनी से हटाकर जबलपुर स्थानांतरित कर दी है। अब दोनों प्रमुख शिकायतों की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) जबलपुर अनु बेनीवाल कर रही हैं।

जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता महेंद्र जैन और अन्य संबंधित गवाह जबलपुर पहुंचकर एएसपी अनु बेनीवाल के समक्ष अपने बयान दर्ज कराने वाले हैं। इससे पहले मामले की प्रारंभिक जांच कटनी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य कर रहे थे।

ट्रांसपोर्ट व्यवसायी महेंद्र कुमार जैन ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि वाहन जांच के दौरान उनकी हाईवा गाड़ी रोककर 30 हजार रुपये की मांग की गई। शिकायत के अनुसार, मौके पर 25 हजार रुपये नकद लिए गए, जबकि शेष 5 हजार रुपये अगले दिन चालक के माध्यम से मंगवाए गए। शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन के साथ कुछ साक्ष्य भी प्रस्तुत किए और निष्पक्ष जांच की मांग की।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने प्रारंभिक कार्रवाई के तहत सीएसपी के चालक आरक्षक केशव सिंह को निलंबित कर दिया था। साथ ही प्रारंभिक जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य को सौंपी गई थी।

प्रशासनिक फेरबदल के तहत सीएसपी नेहा पच्चीसिया के कार्यक्षेत्र से कुठला, माधवनगर और रंगनाथ नगर थाना हटाकर उनका प्रभार अजाक डीएसपी शिवा पाठक को सौंप दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह प्रशासनिक व्यवस्था के तहत किया गया निर्णय है।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य ने बताया कि शिकायतकर्ता के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। अब मामले की विस्तृत जांच जबलपुर में की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

नेहा पच्चीसिया मूलतः मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की पचोर तहसील के एक शिक्षक परिवार से हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) परीक्षा में वर्ष 2016 में चयन प्राप्त कर उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के रूप में सेवा शुरू की थी। इससे पहले वह निजी क्षेत्र में कार्यरत थीं। कोविड-19 काल के दौरान कानून-व्यवस्था के बेहतर प्रबंधन के लिए उन्हें तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा सम्मानित भी किया गया था।

फिलहाल, उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। मामले में किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी या दोष का अंतिम निर्धारण जांच पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा