दतिया : राजघाट के शासकीय आवासों से अपात्र कब्जेदारों पर पुलिस बल के साथ प्रशासन ने की कार्रवाई

 


पुलिस बल के साथ प्रशासन ने की कार्रवाई, नोटिस के बाद भी आवास खाली नहीं करने पर सामान बाहर निकलवाया

दतिया, 18 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के दतिया में राजघाट स्थित शासकीय आवासीय कॉलोनी में लंबे समय से रह रहे अपात्र कब्जेदारों के खिलाफ जिला प्रशासन ने मंगलवार को कार्रवाई की। प्रशासनिक अधिकारियों ने पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर 12 से अधिक लोगों से शासकीय आवास खाली कराए। कार्रवाई के दौरान कॉलोनी में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही।

प्रशासन के अनुसार शासकीय आवासों में ऐसे लोग रह रहे थे, जो नियमानुसार आवास के पात्र नहीं थे। इनमें कुछ मकान पूर्व में सरकारी कर्मचारियों को आवंटित किए गए थे, लेकिन बाद में अन्य लोगों ने उन पर कब्जा कर लिया था। कई कब्जेदारों द्वारा लंबे समय से आवास का किराया भी जमा नहीं किए जाने की जानकारी सामने आई है।

अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई से पहले कब्जेदारों को कई बार नोटिस जारी किए गए थे। करीब आठ दिन पहले अंतिम नोटिस देकर सात दिन के भीतर आवास खाली करने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित अवधि में आवास खाली नहीं किए जाने के बाद मंगलवार को प्रशासन ने पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई शुरू की।

अधिकारियों के पहुंचते ही कई लोगों ने आनन-फानन में अपने घरों से सामान बाहर निकालना शुरू कर दिया। कुछ कब्जेदारों ने प्रशासन से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया। जिन लोगों ने निर्धारित समय में आवास खाली नहीं किए, उनके सामान को प्रशासन की निगरानी में बाहर निकलवाया गया।

कार्रवाई के दौरान भाजपा नेत्री और एसडीएम सोनाली राजपूत के बीच आवास खाली करने को लेकर बहस भी हुई। भाजपा नेत्री ने अपनी बुजुर्ग मां का हवाला देते हुए कुछ समय देने का अनुरोध किया। निर्धारित अवधि में आवास खाली नहीं होने पर उनका सामान ट्रैक्टर में रखवाकर फिल्टर प्लांट परिसर में भिजवा दिया गया।

प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया था। अधिकारियों का कहना है कि शासकीय संपत्ति का उपयोग केवल नियमानुसार पात्र और आवंटित व्यक्तियों द्वारा ही किया जा सकता है। अनधिकृत रूप से कब्जा करने वालों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

कार्रवाई के बाद शासकीय आवासों पर वर्षों से बने रहे अनधिकृत कब्जों को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। साथ ही यह भी चर्चा है कि पात्रता समाप्त होने या आवंटन बदलने के बाद आवास खाली कराने और किराया वसूलने की व्यवस्था प्रभावी ढंग से क्यों नहीं हो सकी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी संपत्ति पर नियम विरुद्ध कब्जे को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा