गैस संकट पर उद्योगों को मिला भरोसा: घबराने की जरूरत नहीं, मिलकर निकालेंगे समाधान
उज्जैन, 24 मार्च (हि.स.)। खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के बीच देशभर में गैस संकट जैसे हालात बन रहे हैं। उद्योगों को गैस की कमी न आए और औद्योगिक उत्पादन बाधित न हो, इसको लेकर मध्य प्रदेश के उज्जैन में एमपीआईडीसी में उद्योगपतियों की अहम बैठक हुई।
बैठक में उद्योगपतियों को भरोसा दिलाया गया कि मौजूदा स्थिति भले चुनौतीपूर्ण है, लेकिन हालात में सुधार के लिए सभी संबंधित एजेंसियां मिलकर बेहतर समाधान की दिशा में काम कर रही हैं। सप्लाई व्यवस्था को सुधारने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही हालात बेहतर होंगे।
एमपीआईडीसी के कार्यकारी संचालक राजेश राठौड़ ने कहा कि कोरोना काल की तरह यह भी एक आपातकाल जैसी स्थिति है, लेकिन बहुत ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। शासन, प्रशासन और गैस कंपनियां मिलकर काम कर रही हैं, ताकि उद्योगों पर इसका कम से कम असर आए। उद्यमियों से भी सहयोग की अपील की और कहा कि किसी भी तरह की समस्या होने पर तत्काल इसकी जानकारी दें, ताकि उसका त्वरित समाधान किया जा सके। साथ ही उद्योग प्रतिनिधियों से ईंधन का वैकल्पिक साधन अपनाने एवं उपलब्धता अनुसार पीएनजी कनेक्शन लेने की समझाइश दी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश को उपलब्ध गैस कोटे में से 5 प्रतिशत हिस्सा उद्योगों के लिए आरक्षित किया है, जिससे उद्योगों में गैस की कमी से निपटने में काफी हद तक मदद मिलेगी और उत्पादन प्रभावित नहीं होगा। पीएनजी सप्लाई को और बेहतर बनाने के लिए गुजरात गैस कंपनी द्वारा तेजी से काम किया जा रहा है। फैक्टरियों तक पीएनजी की लाइन डल चुकी है और जल्द ही सप्लाई शुरू हो जाएगी।
सहायक वितरण अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि उद्योगों की जरूरत के अनुसार गैस देने की पूरी कोशिश की जा रही है। उन्होंने उद्योग प्रतिनिधयों से उनकी वास्तविक मांग भेजने को कहा, ताकि सप्लाई का बेहतर प्रबंधन किया जा सके और किसी भी तरह की कमी की स्थिति न बने। साथ ही फैक्टरियों में चल रही कैंटीन में व्यावसायिक सिलेंडर की वास्तविक खपत की सप्लाई भी निर्बाध जारी रखने का भरोसा दिलाया।
गैस सप्लाई शेड्यूल बेहतर हो, नियमों में छूट मिलेउद्योगपतियों ने गैस सप्लाई में अनिश्चितता को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि सीमित गैस मिलने से उत्पादन सीधे प्रभावित हो सकता है और यूनिट्स को आधी क्षमता पर काम करना पड़ सकता है। इससे न सिर्फ ऑर्डर पूरे करने में दिक्कत आ सकती है, बल्कि लागत भी बढ़ सकती है। उन्होंने गैस सप्लाई का शेड्यूल और स्पष्ट करने और जंबो गैस कनेक्शन को लेकर नियमों में छूट देने और अतिरिक्त गैस उपयोग पर लगने वाले भारी शुल्क को कम करने का सुझाव दिया। साथ ही सरकार से टैक्स में राहत और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने के उपाय करने की मांग की। पीएनजी सप्लाई नेटवर्क को और मजबूत करने और दबाव (प्रेशर) की समस्या दूर करने की भी बात रखी।
यह अस्थायी स्थिति है: राठौड़एमपीआईडीसी के कार्यकारी संचालक राजेश राठौड़ के अनुसार मौजूदा स्थिति चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। यह एक अस्थायी स्थिति है, जिसे सरकार, प्रशासन और गैस कंपनियां मिलकर संभाल रही हैं। उद्योगों को राहत देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जहां भी समस्या आ रही है, उसका प्राथमिकता से समाधान किया जा रहा है और सप्लाई व्यवस्था को बेहतर बनाने पर काम जारी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल