इंदौर: यूपीआई मर्चेंट फीस के विरोध में रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने दुकानों पर लगाए पोस्टर, 4 दिन में 10 लाख लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य
इंदौर, 18 सितंबर (हि.स.)। यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट फीस के विरोध में मध्य प्रदेश के इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने शुक्रवार से पोस्टर अभियान शुरू किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन सहित पदाधिकारी अलग-अलग बाजारों में पहुंचे और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर मर्चेंट फीस के विरोध से संबंधित पोस्टर लगाए। संगठन ने अभियान को सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक स्तर तक पहुंचाने की तैयारी की है। अगले चार दिनों में करीब 10 लाख लोगों तक अभियान की जानकारी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। आम लोगों को इस मुद्दे से जोड़ने के लिए जल्द कॉल सेंटर शुरू करने की भी बात कही गई है।
एसोसिएशन पदाधिकारियों के मुताबिक, डिजिटल भुगतान अब व्यापार और रोजमर्रा के लेनदेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ऐसे में यूपीआई भुगतान पर किसी अतिरिक्त लागत का असर व्यापारियों के साथ-साथ ग्राहकों पर भी पड़ने की आशंका है। अभियान के दौरान व्यापारियों और आम लोगों को प्रस्तावित मर्चेंट फीस तथा उस पर लागू होने वाले 18 प्रतिशत जीएसटी के संभावित वित्तीय प्रभाव को सरल उदाहरणों के जरिए समझाया जाएगा।
अतिरिक्त भार पड़ा तो कीमतों पर असर संभव
एसोसिएशन अध्यक्ष अक्षय जैन ने कहा कि यूपीआई पर 2 हजार रुपए से अधिक के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाए जाने की बात सामने आई है। उनके अनुसार, व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था को अपनाने में सहयोग किया है और आज यह कारोबार का नियमित हिस्सा बन चुका है। जैन ने कहा कि सरकार की ओर से यह कहा जा रहा है कि प्रस्तावित शुल्क का भार सीधे आम उपभोक्ता पर नहीं पड़ेगा, लेकिन व्यापारियों की चिंता यह है कि कारोबार की लागत बढ़ने पर उसका अप्रत्यक्ष असर वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि कम मार्जिन पर कारोबार करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए अतिरिक्त शुल्क का भार चुनौती बन सकता है।
नकद लेनदेन बढ़ने की जताई आशंका
जैन के मुताबिक, व्यापारियों के बीच यह चर्चा भी हो रही है कि यदि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत आती है तो कुछ कारोबारी नकद लेनदेन को प्राथमिकता दे सकते हैं। उनका कहना है कि इससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं। व्यापारी पवन पंवार ने कहा कि मर्चेंट फीस से व्यापारियों की लागत बढ़ेगी। उनके अनुसार, यदि अतिरिक्त खर्च कारोबार की लागत में जुड़ता है तो उसका प्रभाव उत्पादों की कीमतों पर पड़ सकता है। व्यापारियों की मांग है कि प्रस्तावित मर्चेंट फीस के संबंध में पुनर्विचार किया जाए।
अहिल्या चेंबर की बैठक में तय होगी आगे की रणनीति
अक्षय जैन ने बताया कि शुक्रवार शाम अहिल्या चेंबर ऑफ कॉमर्स की बैठक प्रस्तावित है। इसमें व्यापार से जुड़े विभिन्न मुद्दों के साथ यूपीआई मर्चेंट फीस के विषय पर भी चर्चा की जाएगी। बैठक में अभियान को आगे बढ़ाने और व्यापारियों के बीच जागरूकता बढ़ाने की रणनीति पर निर्णय लिया जाएगा। एसोसिएशन का कहना है कि पोस्टर अभियान के साथ सोशल मीडिया और कॉल सेंटर के माध्यम से अधिक से अधिक व्यापारियों और उपभोक्ताओं तक मुद्दे की जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे