इंदौरः अंगदान और देहदान में जागरूकता के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंशर्स करेंगे कार्य

 


- संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने अंगदान की बताई प्रक्रिया और जीवनदान देने वाले सुनाये नायाब किस्से

इंदौर, 11 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर में संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े की अध्यक्षता में सोमवार को अंगदान और देहदान के प्रति सामाजिक सहभागिता और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से इंदौर के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंशर्स की बैठक हुई। बैठक में संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने इंदौर जिले में अंगदान और देहदान के लिए किए जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त दी। साथ ही उन्होंने इंदौर में इस क्षेत्र में अब तक हुए कार्यों और पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया।

उन्होंने इन्फ्लुएंशर्स से इस क्षेत्र में कैसे जागरूकता लाई जाए तथा समाज की शंकाओं को दूर करने में भूमिका निभाने को कहा। संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने इंदौर में हुए अंगदान के संबंध में कई रौचक और नायब कहानियाँ भी बताई। कैसे किसी परिवार के सदस्यों से अंगदान कराया जाता है और उस परिवार में खुशी छा जाती है?

बैठक में संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने कहा कि अंगदान और देहदान एक पवित्र और पुण्य का कार्य है। इस कार्य से लोगों को नया जीवन मिलता है और समाज में बड़ा बदलाव आता है। चैन्नई, बैंगलुरू आदि दक्षिण भारत के शहरों में आज सबसे अधिक देहदान और अंगदान हो रहे हैं, जो गर्व की बात है। मध्य प्रदेश में इंदौर जिले में सबसे अधिक अंगदान और देहदान हो रहे हैं।

संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने कहा कि मध्य प्रदेश में यहाँ एयर एम्बुलेंस की सुविधा भी है, जिससे अंगदान में भी उपयोगी है। उन्होंने बताया कि अंगदान करने वाले परिजनों को गॉड ऑफ ऑनर की शुरूआत करने के बाद अंगदान के मामले 25 प्रतिशत से अधिक बढ़े है। अधिकांश लोग अंधविश्वास और डर के चलते अंगदान और देहदान करने में हिचकिचाते हैं, ऐसे लोगों की मानसिकता सोशल मीडिया इन्फ्लुएंशर्स के माध्यम से बदली जा सकती है।

बैठक में मुस्कान ग्रुप के संदीपन आर्य ने बताया कि अंगदान के लिए इंदौर में ग्रीन कॉरिडोर सबसे पहले वर्ष 2015 में बना था। अभी तक 67 बार ग्रीन कॉरिडोर बन चुके है। त्वचा दान के मामले में इंदौर देश में दूसरे स्थान पर है। वर्ष 2024 में 2237 नेत्रदान हुए, जो 2025 में बढ़कर यह संख्या 2748 हो गई। इंदौर में तीन आई बैंक है। वर्ष 2024 में इंदौर में अंगदान की 135 अनुमति जारी की, जो 2025 में बढ़कर 202 हो गई। मृत्यु के पूर्व व्यक्ति लीवर, किडनी, बोनमेरो और रक्त दान कर सकता है। हृदय गति रूक जाने पर मरीज की आँख, त्वचा, हड्डी और हार्टवॉल्व का दान किया जा सकता है। ब्रेन डेड घोषित होने पर मृत व्यक्ति के हृदय, फेफडे़ और लीवर, किड़नी, पैनक्रियाज, छोटी आँत, हाथ, बौन और हार्टवॉल्व आदि अंगों का दान किया जा सकता है। बताया गया कि इंदौर में दो बार हाथ दान किए गए, जिसमें से एक हाथ इंदौर के युवा इंजीनियर को लगाया गया। जबकि दूसरा हाथ गुजरात के नवसारी जिले में एक 19 वर्षीय लड़की को लगाया गया।

बैठक में अंगदान समिति के डॉ. मनीष पुरोहित, निधि शर्मा, प्रभारी संयुक्त संचालक डॉ. पुष्पेन्द्र वास्कले सहित शहर के करीब 15 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंशर्स उपस्थित रहें।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर