इंदौरः एमपी पीएससी की भर्ती परीक्षाओं मे प्रश्नपत्र रचना एवं मूल्यांकन में गुणवत्ता उन्नयनविषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला
इंदौर, 28 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपी पीएससी) द्वारा आयोग की भर्ती परीक्षाओं मे प्रश्नपत्र रचना एवं मूल्यांकन में गुणवत्ता उन्नयन विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार एवं प्रशिक्षण कार्यशाला का दो दिवसीय आयोजन शनिवार को पावन चिन्तन धारा आश्रम के संस्थापक एवं प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरू प्रोफेसर पवन सिन्हा गुरूजी के मुख्य आतिथ्य एवं आयोग के अध्यक्ष प्रो. राजेश लाल मेहरा की अध्यक्षता में होटल इन्फिनिटी - इन्दौर में प्रारंभ हुआ।
उद्घाटन सत्र अभ्युदय का प्रारंभ माँ सरस्वती की वंदना, राष्ट्र-गीत वन्देमातरम् के गायन तथा प्रदेश के आदिवासी अंचल डिण्डोरी के गोंडी पण्डवानी दल के द्वारा प्रस्तुत वाद्य धुन के साथ हुआ। कार्यक्रम के प्रारंभ में आयोग की सचिव राखी सहाय के द्वारा स्वागत वक्तव्य दिया गया एवं आयोग के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी डॉ. रवीन्द्र पंचभाई द्वारा सेमिनार एवं प्रशिक्षण शाला के संदर्भ में आयोग की संकल्पना की प्रस्तुती दी गई। आयोग के परीक्षा नियंत्रक डॉ. व्ही. के. गुप्ता द्वारा कार्यक्रम के संबंध में वक्तव्य प्रस्तुत किया गया।
उद्घाटन सत्र में संचालक मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी अशोक कड़ेल द्वारा सारस्वत अतिथि के रूप में आयोग की परीक्षाओं में प्रश्न-पत्रों के निर्माण एवं मूल्यांकन में गुणवत्ता के महत्व को रेखांकित करते हुए इस संदर्भ में आयोग के प्रयासों की सराहना की। सत्र को डॉ. राकेश सिंघई कुलगुरू देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर, डॉ. नितेष पुरोहित, डायरेक्टर, एस.जी.एस.आई.टी.एस. द्वारा भी संबोधित किया गया।
प्रोफेसर पवन सिन्हा गुरूजी द्वारा मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में प्रश्न-पत्रों के निर्माण एवं मूल्यांकन में गुणवत्ता के महत्व को रेखांकित करते हुए इस संदर्भ में आयोग के प्रयासों की सराहना की। सिन्हा द्वारा आयोग से यह अपेक्षा की गई कि प्रश्न-पत्रों एवं पाठ्यक्रमों का विनिर्माण इस प्रकार किया जाए जिसमें पर्याप्त मात्रा में भारत तथा भारतीय संस्कृति पर केन्द्रित सामग्री का समावेश जिससे अभ्यर्थियों में राष्ट्रीयता की भावना पल्लवित हो ।
आयोग के अध्यक्ष डॉ. राजेश लाल मेहरा द्वारा आयोग की चयन प्रक्रिया के सामाजिक महत्व को रेखांकित किया तथा आयोग के माध्यम से समाज में हो रहे सकारात्मक परिवर्तनों का उल्लेख किया। श्री मेहरा द्वारा अपने कार्यानुभव के आधार पर आयोग के समक्ष उपस्थित मानवीय पहलुओं से प्रतिभागियों को अवगत कराया तथा आयोग के कार्य सम्पादन में सहयोगी विशेषज्ञ वृंद एवं आयोग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को धन्यवाद भी ज्ञापित किया।
उद्घाटन सत्र के बाद प्रथम तकनीकी सत्र चिंतन आयोग के सदस्य डॉ. एन. के. कोष्टी की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, मध्यप्रदेश की जनजातीय संस्कृति तथा समाजशात्र विषयों पर केंद्रित प्रश्न-पत्र रचना में गुणात्मकता के संदर्भ में विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुति दी गई। प्रथम तकनीकी सत्र डॉ. विनोद शर्मा के द्वारा प्रश्न-पत्र रचना में विविधता, सावधानी और संदर्भों का चयन के संदर्भ में मार्गदर्शन प्रदान किया गया। प्रथम तकनीकी सत्र डॉ. एम.एल. कोरी के सारस्वत उद्बोधन एवं सदस्य एन. के. कोष्टी के अध्यक्षीय संबोधन के साथ सम्पूर्ण हुआ।
द्वितीय तकनीकी सत्र मनन की अध्यक्षता आयोग की सदस्या डाँ. पिंकेश लता रघुवंशी द्वारा की गई। द्वितीय सत्र में गणित / तर्कशास्त्र, सामान्य विज्ञान एवं पर्यावरण, स्वास्थ्य, विधि, हिन्दी, अंग्रेजी एवं कम्प्यूटर विज्ञान विषयों पर केंद्रित प्रश्न-पत्र रचना में गुणात्मकता के संदर्भ में विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुति दी गई। द्वितीय सत्र डॉ. अमीय पहारे द्वारा समसामयिक घटनाओं के प्रश्नों की गुणवत्ता विषय पत्र विशेष उद्बोधन एवं आयोग की सदस्य डॉ. पिंकेश लता रघुवंशी के अध्यक्षीय संबोधन के साथ सम्पूर्ण हुआ ।
द्वितीय सत्र के पश्चात् प्रशिक्षण कार्यशाला मंथन का आयोजन किया गया जिसमें प्रतिभागियों द्वारा खुले मंच से अपने विचारों को अभिव्यक्ति प्रदान की गई।
राष्ट्रीय सेमिनार तथा प्रशिक्षण कार्यशाला के चतुर्थ सत्र के रूप में प्रथम दिवस का अंतिम सत्र सास्कृतिक संध्या के रूप में आयोजित किया गया जिसमें गोंडी पण्डवानी दल ग्राम बिजोरी जिला डिण्डोरी द्वारा प्रदेश के आदिवासी अंचल के संगीत तथा नृत्य कार्यक्रमों की नयनाभिराम प्रस्तुति दी गई। राष्ट्रीय सेमिनार एवं प्रशिक्षण कार्यशाला का शेष भाग 29 मार्च 2026 को आयोजित किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर