अंगदान में इंदौर को नंबर वन बनाने की तैयारी, अस्पतालों में नियुक्त होंगे ट्रांसप्लांट कॉर्डिनेटर

 


- संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े की अध्यक्षता में विभिन्न अस्पताल संचालकों की बैठक आयोजित

इंदौर, 07 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश को इंदौर शहर को अंगदान में देश में अव्वल बनाने की तैयारी चल रही है। इसी क्रम में मंगलवार को इंदौर संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने अंगदान को बढ़ावा के उद्देश्य से शहर के विभिन्न अस्पतालों के संचालकों की बैठक ली।

बैठक में संभागायुक्त डॉ. खाडे़ ने कहा कि अंगदान के क्षेत्र में इंदौर संभाग अच्छा कार्य कर रहा है। इसमें शहर के 13 अस्पतालों के संचालक, डॉक्टर्स और विभिन्न सामाजिक संस्थाएं लगातार जागरूकता के कार्यक्रम चला रही है। इन कार्यक्रमों को एक सकारात्मक आंदोलन के रूप में बदलने की आवश्यकता है, ताकि इंदौर संभाग अंगदान के क्षेत्र में केवल प्रदेश में ही नहीं देश में भी अव्वल आ सके।

डॉ. खाड़े ने कहा कि अंगदान मानवता को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अत: इस कार्य को मानवीयता और संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिये। अंगदान के प्रति लोगों को अधिक से अधिक प्रेरित करने की आज आवश्यकता है। जो लोग अंगदान करना चाहते हैं लेकिन आर्थिक अभाव के कारण निर्णय नहीं ले पाते, ऐसे लोगों को चिन्हित कर उन्हें आर्थिक मदद की जाए। संभागायुक्त डॉ. खाडे ने कहा कि अंगदान से समाज में एक बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

बैठक में इंदौर सोसायटी फॉर आर्गन डोनेशन की ओर से नोडल अधिकारी डॉ. मनीष पुरोहित, संदीपन आर्य, जीतू बागानी, डॉ. अनिल भण्डारी, स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त संचालक डॉ. पूर्णिमा गडरिया, इंदौर आई बैंक से उमा जौहर, डॉ. तरूण गुप्ता सहित चोइथराम हॉस्पीटल, अपोलो राजश्री, सीएचएल, अमलतास, श्री अरबिंदो हॉस्पीटल, शैल्बी हॉस्पीटल, मेदांता हॉस्पीटल, सीएचएल केयर, एमिनेंट आदि अस्पतालों के संचालक एवं उनके प्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक में संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने सभी अस्पताल संचालकों को कहा कि वे अपने संस्थान में ट्रांसप्लांट कॉर्डिनेटर को नियुक्त करें, ताकि अंगदान के बारे में अधिक जानकारी समय पर मिल सके। ट्रांसप्लांट कॉर्डिनेटर की एक सूची बनाये जाये, जिससे सभी अस्पताल के साथ शासन स्तर पर भी समन्वय स्थापित हो सके। अंगदान के बारे में सही जानकारियों का आदान-प्रदान हो सके, यह सुनिश्चित किया जाये। अंगदान के बारे में संभाग के बड़े अस्पताल, छोटे अस्पतालों को अपने साथ जोड़ सकें, इस पर कार्य करने की आवश्यकता है। अंगदान के लिये एक जिले से दूसरे जिले में प्रयुक्त किये जाने वाले एम्बुलेंस की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाये। अंगदान प्रत्यारोपण हेतु चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया जाये। इसके लिये समय-समय पर शिविर, कार्यशाला, सेमिनार आदि आयोजित किये जाये। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, सहायिकाएं आदि को भी प्रशिक्षिण किया जाये। सभी अस्पतालों में अंगदान को बढ़ावा देने संबंधित पोस्टर, होर्डिंग्स, बैनर्स आदि लगाये जायें।

बैठक में संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने कहा कि अंगदान के लिये प्रतिज्ञा पत्र भरकर नोटो (नेशल ऑर्गन एण्ड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइनेशन) के साथ पंजीकरण किया जा सकता है। अंगदान केवल ब्रेन डेन घोषित होकर अस्पताल में मृत्यु होने की स्थिति में ही प्रभावी रूप से हो सकता है, जहां अंग सुरक्षित रहते हैं।

बैठक में बताया गया कि अंगदान वह प्रक्रिया है जिसमें जीवित या मृत व्यक्ति के स्वस्थ अंगों या ऊतकों को शल्य क्रिया द्वारा निकालकर किसी ऐसे व्यक्ति में प्रत्यारोपित किया जाता है जिसके अंग फेल हो चुके हैं या ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। इसे जीवन का उपहार भी कहा जाता है, जो किसी के लिये नये जिंदगी का मौका हो सकता है।

बैठक में डॉ. अनिल भण्डारी ने कहा कि अंगदान करने वाले परिजनों को शासन द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर देने का समाज में सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इसके बाद अंगदान करने वालों की संख्या में भी उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है। बैठक में नेत्रदान, हृदय प्रत्यारोपण, किडनी दान, आदि भी चर्चा हुई। बैठक में डॉ. विवेक जोशी, संदीपन आर्य, मनीष गुप्ता, डॉ. अंकुर गुप्ता, डॉ. संजय गिद्ध ने भी अपने विचार रखें।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर