इंदौर में सड़क चौड़ीकरण के लिए बड़ी कार्रवाई, 80 से अधिक मकान हटाए गए, प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास की मांग उठाई
इंदौर, 15 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के जूना रिसाला क्षेत्र में गुटकेश्वर मंदिर से सदर बाजार मार्ग तक सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत सोमवार सुबह नगर निगम ने बड़े पैमाने पर रिमूवल अभियान चलाया। सड़क निर्माण में बाधक माने गए 80 से अधिक मकानों और निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की गई।
निगम का दावा है कि प्रभावितों को पूर्व में नोटिस जारी किए गए थे, जबकि रहवासियों का आरोप है कि बिना उचित पुनर्वास और मुआवजे के उनके वर्षों पुराने आशियाने तोड़ दिए गए।
नगर निगम के रिमूवल विभाग ने सुबह 8 बजे से अभियान शुरू किया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। रिमूवल अधिकारी अंकेश बिरथरिया के अनुसार कार्रवाई में 9 पोकलेन मशीनें, 5 जेसीबी और 100 से अधिक निगमकर्मी लगाए गए। प्रशासन ने लगभग 85 मकानों को हटाने के लिए नोटिस जारी किए थे। नगर निगम के अनुसार यह कार्रवाई मास्टर प्लान के तहत की जा रही है। गुटकेश्वर मंदिर से सदर बाजार तक का मार्ग 60 फीट चौड़ा किया जाना प्रस्तावित है। अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से इस क्षेत्र में अतिक्रमण और संकरी सड़क के कारण लगातार जाम की स्थिति बनती रही है। सड़क चौड़ी होने से क्षेत्र में यातायात सुगम होगा और नागरिकों को राहत मिलेगी।
प्रभावित परिवारों का आरोप-‘बिना पुनर्वास उजाड़ दिए घर’
कार्रवाई से प्रभावित परिवारों ने निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वर्षों से बसे मकानों को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के तोड़ दिया गया। प्रभावितों का आरोप है कि न तो उन्हें मुआवजा दिया गया और न ही रहने के लिए प्लॉट या फ्लैट की व्यवस्था की गई।
65 वर्षीय कृष्णा पाठक ने भावुक होकर बताया कि उनका परिवार चार पीढ़ियों से इसी इलाके में रह रहा था। उन्होंने कहा, “मेरा जन्म इसी घर में हुआ था। आज मेरी उम्र 65 साल है और हमारे पांच परिवार इसी मकान में रहते थे। कार्रवाई में पूरा मकान टूट गया। मैं विधवा हूं, लेकिन हमें कोई मुआवजा या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं दी गई।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आसपास की कुछ सरकारी जमीनों को छोड़कर केवल रहवासियों के मकानों पर कार्रवाई की गई।
प्रभावित महिला राजकुमारी मिश्रा ने बताया कि वह और उनके पति दोनों निराश्रित हैं और उनका कोई सहारा नहीं है। उन्होंने कहा, “नोटिस मिले थे, लेकिन प्रशासन को रहने के लिए दूसरी जगह भी देनी चाहिए थी। मकान का बड़ा हिस्सा टूट चुका है। अब बची हुई जगह भी हटाने की बात कही जा रही है। ऐसे में हम कहां रहेंगे?”
कुछ लोगों का दावा- निशान से अधिक तोड़फोड़
कार्रवाई के दौरान कई रहवासियों ने आरोप लगाया कि निर्धारित सीमा से अधिक हिस्से तोड़ दिए गए। उनका कहना है कि अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी गई। कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि जहां पहले से पर्याप्त चौड़ी सड़क मौजूद थी, वहां मकानों को हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
कार्रवाई के दौरान शहर कांग्रेस अध्यक्ष एवं नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने भाजपा सरकार और नगर निगम प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि विकास कार्यों के नाम पर गरीबों के साथ अन्याय किया जा रहा है। चौकसे ने प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।
निगम का पक्ष
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण की यह कार्रवाई पूर्व सूचना और निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई है। प्रभावितों को पहले ही नोटिस देकर स्वयं अतिक्रमण हटाने का अवसर दिया गया था। कई लोगों ने अपने निर्माणों के बाधक हिस्से स्वेच्छा से भी हटाए हैं। निगम का दावा है कि परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र में यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे