इंदौर: यूपीआई सरचार्ज के विरोध में व्यापारियों का ऐलान, दुकानों से हटाएंगे क्यूआर कोड
इंदौर, 09 अक्टूबर (हि.स.)। यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित सरचार्ज को लेकर इंदौर के व्यापारियों ने विरोध तेज करने का फैसला किया है। अहिल्या चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की बैठक में व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों ने दुकानों से यूपीआईके क्यूआर कोड हटाने और नकद भुगतान को प्राथमिकता देने की घोषणा की। व्यापारियों ने कहा कि जब तक प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) संबंधी शुल्क पर पुनर्विचार नहीं होता, तब तक वे इसके विरोध में अपना अभियान जारी रखेंगे।
शुक्रवार को चैंबर अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभिन्न व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अतिरिक्त शुल्क को लेकर चिंता जताई। बैठक में ‘यूपीआईसरचार्ज हाय-हाय’ और ‘यूपीआईसरचार्ज बर्दाश्त नहीं’ जैसे नारे लगाकर विरोध दर्ज कराया गया। व्यापारियों का कहना है कि नए शुल्क से कारोबार की लागत बढ़ेगी और इसका असर खासकर छोटे व मध्यम कारोबारियों के मुनाफे पर पड़ेगा।
व्यापारियों का तर्क- कारोबार पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
बैठक में व्यापारियों ने कहा कि महंगाई, बढ़ती परिचालन लागत और सीमित मुनाफे के बीच अतिरिक्त शुल्क कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा सकता है। उनका मानना है कि डिजिटल भुगतान की सुविधा अपनाने वाले व्यापारियों पर नया आर्थिक बोझ डालने के बजाय शुल्क के प्रस्ताव पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।
चैंबर अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल ने कहा कि व्यापारियों का विरोध सरकार की नीतियों के खिलाफ नहीं, बल्कि अतिरिक्त शुल्क के प्रस्ताव को लेकर है। उन्होंने कहा कि व्यापारी देश की आर्थिक गतिविधियों और विकास में सहयोग करते रहे हैं, लेकिन बैंकों की आर्थिक स्थिति को सहारा देने के लिए कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ डालना उचित नहीं है। व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से शुल्क का उपयोग सुनिश्चित किया जाता, तो वे इस पर विचार कर सकते थे। फिलहाल उनकी मांग प्रस्तावित शुल्क वापस लेने की है।
पांच दिन बाजारों में चलेगा जनसंपर्क अभियान
अहिल्या चैंबर्स के संयुक्त सचिव और इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने बताया कि 23 सितंबर को आयोजित ‘नो यूपीआई डे’ के जरिए व्यापारियों ने सरचार्ज के विरोध में अपना संदेश दिया था। अब आंदोलन के अगले चरण में चैंबर्स के पदाधिकारी पांच दिनों तक शहर के अलग-अलग व्यापारिक क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान चलाएंगे। इस अभियान के दौरान दुकानदारों और व्यापारिक संगठनों को प्रस्तावित शुल्क के संभावित प्रभावों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, अधिक से अधिक व्यापारियों को एकजुट कर सामूहिक विरोध को आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
क्यूआर कोड हटाकर नकद भुगतान पर जोर
व्यापारियों ने बैठक में कहा कि यदि अतिरिक्त शुल्क लागू होता है, तो वे दुकानों से यूपीआईक्यूआर कोड हटाकर नकद भुगतान को प्राथमिकता देने पर विचार करेंगे। उनका तर्क है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई व्यवस्था में अतिरिक्त लागत जुड़ने से छोटे कारोबारियों की परेशानी बढ़ सकती है। व्यापारिक संगठनों ने सरकार से प्रस्तावित शुल्क पर पुनर्विचार कर इसे वापस लेने की मांग की है। अब पांच दिवसीय जनसंपर्क अभियान के दौरान व्यापारियों का कितना समर्थन मिलता है और शुल्क को लेकर आगे क्या निर्णय होता है, इस पर आंदोलन की अगली रणनीति निर्भर करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे