सागरः रहली में लगाया विशेष जागरूकता और स्वास्थ्य शिविर, इनहेलर के भ्रम को किया दूर
सागर, 16 मई (हि.स.)। बदलते मौसम और लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण के इस दौर में अस्थमा (दमा) एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभर रहा है। इसी के मद्देनजर, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सागर शाखा और स्वास्थ्य विभाग, सागर के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को विश्व अस्थमा दिवस के उपलक्ष्य में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, रहली में एक विशेष अस्थमा जागरूकता एवं स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया।
इस शिविर में स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों और आशा कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम जनता को अस्थमा के शुरुआती लक्षणों, इसकी आधुनिक जांचों, सही उपचार और बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक करना था।
शिविर को संबोधित करते हुए आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने पर्यावरण और स्वास्थ्य के अंतर्संबंधों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज के समय में वायु प्रदूषण, धूल-मिट्टी, कंस्ट्रक्शन से उड़ने वाले कण और वातावरण में मौजूद हानिकारक तत्व अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ने का सबसे बड़ा कारण हैं। ऐसी स्थिति में सावधानी और सही इलाज ही एकमात्र बचाव है।
डॉ. साद ने समाज में इनहेलर को लेकर फैली रूढ़िवादी सोच और अफवाहों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम जनता में यह गलत धारणा है कि एक बार इनहेलर शुरू करने पर इसकी आदत पड़ जाती है, जो कि पूरी तरह भ्रामक है। इनहेलर का नियमित और सही इस्तेमाल अस्थमा अटैक के खतरे को 80 प्रतिशत तक कम कर देता है। मुंह से खाई जाने वाली गोलियों या सिरप की तुलना में इनहेलर सीधे फेफड़ों तक पहुंचता है, इसलिए यह बेहद सुरक्षित है और इसके साइड इफेक्ट्स (दुष्प्रभाव) भी न के बराबर हैं।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. तल्हा साद ने अस्थमा से जुड़े कुछ बेहद चौंकाने वाले और चिंताजनक वैश्विक आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में विश्वभर में लगभग 262 मिलियन (26.2 करोड़) लोग अस्थमा की बीमारी से पीड़ित हैं। उचित इलाज और जागरूकता के अभाव में प्रतिवर्ष 4.5 लाख से अधिक लोगों की मौत इस बीमारी के कारण हो जाती है।
यदि किसी व्यक्ति को निम्न समस्याएं लगातार हो रही हैं, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए: सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई या छोटी सांस आना। सीने में लगातार भारीपन या जकड़न महसूस होना। सूखी या बलगम वाली लगातार खांसी आना। सांस लेते या छोड़ते समय गले/सीने से घरघराहट (सीटी जैसी आवाज) आना।
केवल किताबी ज्ञान देने के बजाय, शिविर में व्यावहारिक समझ पर जोर दिया गया। डॉक्टरों की टीम ने मरीजों और आम नागरिकों के सामने इनहेलर और नेब्युलाइजर के सही उपयोग का लाइव डेमोंस्ट्रेशन (जीवंत प्रदर्शन) दिया। उपस्थित लोगों को सिखाया गया कि इनहेलर को किस तरह पकड़ना है, सांस को कब रोकना है और दवा को फेफड़ों तक कैसे पहुंचाना है।
धूल-मिट्टी, धुएं और अत्यधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। घर से बाहर निकलते समय हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले मास्क का उपयोग करें। फ्रिज का अत्यधिक ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक्स और ठंडी खाद्य सामग्रियों से परहेज करें। इस विशेष अवसर पर स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर तक मजबूत बनाने वाले कर्मवीरों की हौसलाअफजाई भी की गई। चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट और अनुकरणीय सेवाएं प्रदान करने वाले नर्सिंग स्टाफ, ओटी तकनीशियन (OT Technician) और अन्य सहायक कर्मचारियों को आईएमए (IMA) सागर की ओर से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के समापन सत्र में डॉ. बसंत नेमा ने शिविर को सफल बनाने के लिए उपस्थित सभी अतिथि डॉक्टरों, प्रशासनिक अमले, आशा कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय नागरिकों का हृदय से आभार व्यक्त किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे