अनूपपुर: अनुराधा नक्षत्र के शुभ मुहूर्त पर सैकड़ों बच्चों का हुआ मुंडन, उमड़ी भीड़, अगला अवसर डेढ़ माह बाद

 




अनूपपुर, 04 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले की पवित्र नगरी अमरकंटक सोमवार को भक्ति और आस्था के संगम में सराबोर नजर आई। मां नर्मदा उद्गम स्थल मंदिर परिसर में मुंडन संस्कार कराने के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। अनुराधा नक्षत्र के विशेष संयोग पर सैकड़ों माता-पिता अपने नौनिहालों के साथ यहां पहुंचे और विधि-विधान से मुंडन संस्कार संपन्न कराकर मां नर्मदा का आशीर्वाद लिया।

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, मुंडन संस्कार के लिए ज्येष्ठ मास की 4 मई सोमवार की तिथि अत्यंत शुभ मानी गई थी। अनुराधा नक्षत्र का यह संयोग इस माह का एकमात्र श्रेष्ठ मुहूर्त था। इससे पूर्व 29 अप्रैल को मुंडन के लिए शुभ तिथि थी। पंचांग के अनुसार, अब आने वाले डेढ़ माह तक कोई भी उपयुक्त मुहूर्त नहीं है। अगली शुभ तिथि 17 जून (ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष तृतीया, पुनर्वसु नक्षत्र) को आएगी। इसी कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु अंतिम अवसर का लाभ उठाने के लिए अमरकंटक पहुंचे।

सुबह से ही रामघाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी। पवित्र नर्मदा जल में स्नान कर लोगों ने पूजा-अर्चना की। इसके बाद मंदिर परिसर में मुंडन संस्कार का क्रम प्रारंभ हुआ, जो देर शाम तक निरंतर चलता रहा। पूरे वातावरण में मंगल गीतों की गूंज और वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि से भक्ति का अद्भुत माहौल बना रहा। माता-पिता ने अपने बच्चों के उज्ज्वल, सुखमय और दीर्घायु जीवन की कामना की।

मंदिर के पुजारी पंडित धनेश द्विवेदी ‘वंदे महाराज’ ने बताया कि यह मुंडन संस्कार के लिए अत्यंत शुभ लग्न मुहूर्त था। इस दौरान कराए गए संस्कार विशेष रूप से फलदायी और कल्याणकारी माने जाते हैं।

इस अवसर पर दूर-दराज से आए परिवारों में भारी उत्साह देखा गया। बिलासपुर से पहुंचीं भारती दुबे ने अपने पुत्र विनायक का मुंडन संस्कार संपन्न कराया, वहीं हार्दिक कौशिक के परिजनों ने भी पूरे विधि-विधान के साथ अनुष्ठान पूर्ण किया। शहडोल जिले के गोहपारु से आए जायसवाल परिवार ने अपनी पुत्री मन्नत का मुंडन संस्कार हर्षोल्लास के साथ कराया। नर्मदा तट पर उमड़ी इस भीड़ से तीर्थ नगरी का चप्पा-चप्पा श्रद्धालुओं से भरा रहा। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति के सदस्य भी पूरी तरह मुस्तैद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला