सागर: गढ़ाकोटा में करीब 250 सालों से हिंदू परिवार बना रहा ताजिया, सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल

 


सागर, 26 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर जिले के गढ़ाकोटा नगर से शुक्रवार को सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की एक ऐसी अनुपम तस्वीर सामने आई है, जो पूरे समाज को एकता का संदेश दे रही है। यहाँ एक हिंदू परिवार पिछले करीब ढाई सौ वर्षों (250 साल) से मोहर्रम के मौके पर ताजिया और बुर्राख बनाकर हिंदू-मुस्लिम एकता की एक नई मिसाल पेश कर रहा है।

गढ़ाकोटा के सुभाष वार्ड निवासी अभिषेक विश्वकर्मा का परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस अनोखी परंपरा को पूरी शिद्दत से निभा रहा है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि यह परंपरा उनके पूर्वजों के जमाने से चली आ रही है। बदलते दौर के बाद भी आज की युवा पीढ़ी पूरी श्रद्धा, नियम और समर्पण के साथ इस जिम्मेदारी का निर्वहन कर रही है।

मोहर्रम का महीना शुरू होने से करीब दो महीने पहले ही विश्वकर्मा परिवार के घर में ताजिया निर्माण का काम युद्ध स्तर पर शुरू हो जाता है। बांस की बारीक खपच्चियों, चमकीले रंगीन कागज, मखमल के कपड़े और अन्य पारंपरिक सजावटी सामग्रियों का उपयोग किया जाता है। कड़ी मेहनत से तैयार किए गए ये ताजिया और बुर्राख कलात्मकता के मामले में बेहद आकर्षक और भव्य होते हैं, जिन्हें देखने दूर-दूर से लोग आते हैं।

हमारे लिए यह सिर्फ एक कला या कारीगरी नहीं है, बल्कि यह हमारी आस्था, सेवा और इंसानियत का सबसे बड़ा प्रतीक है। हमारे बुजुर्गों ने हमें हमेशा सभी धर्मों का दिल से सम्मान करना सिखाया है। उसी विरासत और सीख को आज हमारा पूरा परिवार आगे बढ़ा रहा है। — अभिषेक विश्वकर्मा, गढ़ाकोटा

गढ़ाकोटा में यह खूबसूरत जज्बा सिर्फ विश्वकर्मा परिवार तक ही सीमित नहीं है। यहाँ के खटीक समाज और रैकवार समाज के कई परिवार भी वर्षों से मोहर्रम के अवसर पर ताजिया बनाने की परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ निभाते आ रहे हैं। यही कारण है कि बुंदेलखंड के इस अंचल में हमेशा सांप्रदायिक सौहार्द की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर देखने को मिलती है। यहाँ ईद हो, होली हो या दीपावली हो, सभी धर्मों के लोग जाति और मजहब की दीवारों को गिराकर हर त्योहार मिल-जुलकर मनाते हैं। गढ़ाकोटा की यह गौरवशाली परंपरा आज के समाज के लिए आपसी प्रेम और भाईचारे का एक बेहतरीन उदाहरण है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे