मप्रः स्कूली यूनिफॉर्म के 350 करोड़ के टेंडर पर हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार से एक सप्ताह में मांगा जवाब

 


जबलपुर, 07 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी स्कूलों की यूनिफॉर्म आपूर्ति के लिए जारी लगभग 350 करोड़ रुपये के टेंडर पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार से एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक टेंडर प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा। मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा 3 जून 2026 को जारी किए गए इस टेंडर को अल्पसंख्यक पिछड़ा वर्ग पावरलूम बुनकर संघ सहित तीन बुनकर संगठनों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

शुक्रवार को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता श्रेयस धर्माधिकारी और तीर्थेश भारिल्ल ने पक्ष रखा, जबकि राज्य शासन की ओर से डॉ. एस.एस. चौहान उपस्थित हुए। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने शासन से एक सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए और मामले को पूर्व से लंबित संबंधित याचिका के साथ संबद्ध कर दिया।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 1993 से राज्य स्तरीय पावरलूम सहकारिता समिति सरकारी स्कूलों की यूनिफॉर्म की आपूर्ति के लिए प्रमुख एजेंसी के रूप में कार्य करती रही है। उनका तर्क है कि मध्य प्रदेश भंडार क्रय नियम, 2023 के अनुसार राज्य उपक्रमों से सामग्री की खरीद के लिए खुली निविदा जारी करने की आवश्यकता नहीं होती। इसके बावजूद पाठ्यपुस्तक निगम ने स्थापित नियमों की अनदेखी करते हुए खुली निविदा जारी कर दी, जो नियमों के विपरीत है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि इस टेंडर प्रक्रिया से प्रदेश के पावरलूम और स्पिनिंग मिल उद्योगों से जुड़े लगभग दो लाख बुनकर परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। बुनकर संगठनों का कहना है कि बड़ी संख्या में उद्योग संचालकों ने अपने प्रतिष्ठानों के संचालन के लिए बैंकों से ऋण ले रखा है। ऐसे में यदि उन्हें यूनिफॉर्म आपूर्ति का कार्य नहीं मिला तो उनकी आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

मामले की अगली सुनवाई तक हाई कोर्ट ने टेंडर प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं देने के निर्देश दिए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक