मप्रः दुबई में रह रहे कारोबारी सतीश सनपाल को हाई कोर्ट से राहत नहीं
जबलपुर, 11 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर स्थित मुख्य पीठ ने दुबई में रह रहे कारोबारी सतीश सनपाल को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी रिट याचिका खारिज कर दी है।
न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए भारत आए बिना वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जांच में शामिल होने और बयान दर्ज कराने की मांग अस्वीकार कर दी। साथ ही लॉर्डगंज थाने में दर्ज एफआईआर निरस्त करने की मांग भी खारिज कर दी।
सतीश सनपाल ने उच्च न्यायलय में याचिका दायर कर कहा था कि वह करीब आठ वर्षों से संयुक्त अरब अमीरात में रह रहे हैं और दुबई में कारोबार करते हैं। वर्ष 2020 के बाद से वह भारत नहीं आए हैं। उन्होंने पुलिस द्वारा जांच में शामिल होने के लिए जारी नोटिस के जवाब में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बयान दर्ज कराने की अनुमति मांगी थी।
मामला लॉर्डगंज थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 441/2022 से जुड़ा है। इसमें जुआ अधिनियम की धारा 4-ए के साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 109 और 34 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। सनपाल का दावा था कि एफआईआर में उनका नाम शामिल नहीं है।
पुलिस ने 25 जून और छह जुलाई 2026 को सनपाल को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किए थे। उनकी ओर से अधिवक्ता विपिन यादव ने बीएनएस की धारा 180(3) और 530 का हवाला देते हुए ऑडियो-वीडियो माध्यम से बयान दर्ज करने की अनुमति मांगी। अदालत ने कहा कि जांच का तरीका तय करना जांच एजेंसी के अधिकार क्षेत्र में है और कोई आरोपी अपनी सुविधा के अनुसार जांच की प्रक्रिया निर्धारित नहीं कर सकता।
कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने की मांग भी ठुकराते हुए कहा कि मामले में संज्ञेय अपराध के आरोप हैं और जांच अभी जारी है। ऐसे में इस स्तर पर एफआईआर निरस्त करने का आधार नहीं बनता। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता बीडी सिंह ने पक्ष रखा। 29 जुलाई को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक