फायर सेफ्टी और निगम की अनुमति के बिना निजी अस्पतालों का पंजीयन? हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी ताजा रिपोर्ट

 


जबलपुर, 06 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में फायर सेफ्टी की अनिवार्य मंजूरी और नगर निगम की जरूरी अनुमति के बिना निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होम को पंजीयन दिए जाने के आरोपों को लेकर दायर पांच जनहित याचिकाओं पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार से ताजा स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।

चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को रिपोर्ट पेश करने के लिए चार दिन का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।

लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन एवं अन्य की ओर से दायर जनहित याचिकाओं में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पंजीयन की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने आरटीआई से प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए बताया कि जबलपुर शहर में करीब 160 निजी अस्पताल और नर्सिंग होम संचालित हैं। इनमें से 63 संस्थानों का पंजीयन वर्ष 2019 से 2021 के बीच किया गया।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि जबलपुर सीएमएचओ कार्यालय में नए निजी अस्पतालों के पंजीयन के दौरान निर्धारित नियमों और प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि अस्पतालों का मौके पर भौतिक सत्यापन करने के बजाय केवल ऑनलाइन आवेदन और अधूरे दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन जारी किए जा रहे हैं।

जनहित याचिकाओं में सबसे अहम सवाल यह उठाया गया है कि यदि किसी निजी अस्पताल के पास अनिवार्य फायर सेफ्टी की मंजूरी अथवा नगर निगम की आवश्यक अनुमति ही नहीं है, तो ऐसे संस्थान को पंजीयन किस आधार पर जारी किया जा रहा है।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इस तरह की प्रक्रिया न केवल निर्धारित नियमों के विपरीत है, बल्कि अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा से भी सीधे जुड़ी हुई है। उन्होंने पंजीयन प्रक्रिया की जांच कराने और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग हाईकोर्ट से की है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने कोर्ट को बताया कि सरकार पहले ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर चुकी है। हालांकि, वर्तमान स्थिति से संबंधित ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए उन्होंने चार दिन का समय मांगा।

हाईकोर्ट ने सरकार को समय देते हुए निर्देश दिया कि नई स्टेटस रिपोर्ट की प्रतियां याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं को भी उपलब्ध कराई जाएं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आलोक बगरेचा और अमिताभ गुप्ता ने पैरवी की। अब 12 अक्टूबर को सरकार की ताजा रिपोर्ट के आधार पर मामले की आगे सुनवाई होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक