धार्मिक हिंसा की रिपोर्टिंग पर दर्ज एफआईआर रद्द, हाईकोर्ट ने कहा तथ्यात्मक पत्रकारिता अपराध नहीं
जबलपुर, 03 नवंबर (हि.स.)। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रायसेन के यूट्यूबर उवेश खान के खिलाफ सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोप में दर्ज एफआईआर रद्द कर दी है। जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने कहा कि वास्तविक घटना या हिंसा की निष्पक्ष और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करना अपराध नहीं है।
मामला 6 सितंबर 2025 को रायसेन जिले के सिलवानी में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। घटना में कुछ लोग घायल हुए थे। उवेश खान ने अपने यूट्यूब न्यूज चैनल पर घटना की रिपोर्टिंग की थी। शिकायतकर्ता ने खबर को भ्रामक बताते हुए आरोप लगाया था कि इससे हिंदू समुदाय में डर और भ्रम फैला तथा सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका पैदा हुई। इसके आधार पर सिलवानी पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1) के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जिस घटना की रिपोर्टिंग की गई, उसके संबंध में पुलिस पहले ही अलग एफआईआर दर्ज कर चुकी थी। वास्तविक घटनाओं की सटीक और निष्पक्ष रिपोर्टिंग को सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने वाला अपराध नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता के तहत तथ्यात्मक रिपोर्टिंग को संरक्षण प्राप्त है, हालांकि यह पत्रकारों को हर प्रकार की कानूनी कार्रवाई से पूर्ण छूट नहीं देता।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक