जबलपुरः साइबर ठगी पर हाईकोर्ट सख्त, एसपी समेत तीन अधिकारियों को किया तलब

 


जबलपुर, 04 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने 6.24 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले की जांच में हो रही धीमी प्रगति पर कड़ी नाराजगी जताते हुए जबलपुर पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने जबलपुर के पुलिस अधीक्षक, गोराबाजार थाना प्रभारी और मामले के विवेचना अधिकारी को अगली सुनवाई में मूल केस डायरी के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है।

शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि घटना को एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आरोपी अब तक गिरफ्तार नहीं किए जा सके हैं। अदालत ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि जब जांच एजेंसी के पास आरोपियों से संबंधित पर्याप्त जानकारी उपलब्ध है, तब भी कार्रवाई में इस तरह की सुस्ती स्वीकार्य नहीं है।

अदालत ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और इनका सबसे अधिक असर आम नागरिकों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों पर पड़ रहा है।

हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी को अगली सुनवाई में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में अब तक की गई सभी जांच संबंधी कार्रवाइयों का ब्यौरा देना होगा। अदालत ने विशेष रूप से पूछा है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कितने स्थानों पर दबिश दी गई, किन-किन राज्यों की पुलिस से संपर्क किया गया, उनके साथ क्या पत्राचार हुआ, कौन-कौन से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए गए तथा जांच पूरी होने की संभावित समय-

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल और झारखंड के पुलिस महानिदेशकों को भी पक्षकार बनाए जाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव (गृह) को भी मामले में पक्षकार बनाने का आदेश दिया गया है। अदालत का मानना है कि चूंकि मामला कई राज्यों से जुड़ा है, इसलिए संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि ऐसे मामलों की जांच के लिए स्थायी विशेष जांच दल अथवा विशेष जांच तंत्र गठित करने की आवश्यकता पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक