मप्रः नर्सिंग फर्जीवाड़ा मामले में हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

 


जबलपुर, 25 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग फर्जीवाड़े से जुड़े प्रकरण में मंगलवार को उच्च न्यायालय सुनवाई हुई।

एक ओर ग्वालियर-चंबल संभाग के नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है, जिसमें कुछ छात्रों ने 13 अगस्त के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर की डिवीजन बेंच ने ग्वालियर-चंबल संभाग के कॉलेजों के छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इन कॉलेजों के छात्रों की ओर से तर्क दिया गया था कि उनकी सीबीआई जांच पर सुप्रीम कोर्ट का स्थगन है, इसलिए उन्हें पूर्व वर्षों की भांति परीक्षा में शामिल किया जाए ।

हाईकोर्ट ने पाया कि इन कॉलेजों की पूर्व की जांच (2021 में ग्वालियर बेंच द्वारा गठित 10-सदस्यीय समिति) में फैकल्टी डुप्लीकेसी की जांच नहीं हुई थी, अतः बगैर सीबीआई जांच के कोई राहत देने से इनकार कर दिया । सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने छात्रों से कहा कि वे उस प्रबंधन से सवाल करें जिसे उन्होंने फीस, डोनेशन या अन्य राशि दी है कॉलेज प्रबंधन सीबीआई जांच का सामना करे, अगर कॉलेज नियमों के मुताबिक सही है तो जांच में यह स्पष्ट हो जाएगा । सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी खारिज कर छात्रों को परीक्षाओं की अनुमति के लिए हाईकोर्ट जाने की सलाह दी है ।

हाईकोर्ट में सुनवाई

दूसरी ओर हाईकोर्ट ने मंगलवार को ही नर्सिंग मामले में दाख़िल लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल की जनहित याचिका सहित अन्य नर्सिंग मामलों में सुनवाई हुई । इस दौरान ग्वालियर-चंबल संभाग के कॉलेजों को हाईकोर्ट ने बगैर सीबीआई जांच के कोई भी राहत देने से इंकार करते हुए टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि ये कॉलेज सीबीआई जांच कराने की वचनबद्धता (अंडरटेकिंग) प्रस्तुत करते और इस आशय का स्पष्टीकरण सुप्रीम कोर्ट से लेकर आएं, तो उनकी सीबीआई जांच कराई जाकर, उनकी श्रेणी के आधार पर उनके छात्रों की परीक्षाएं आयोजित कराई जा सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद कुछ कॉलेजों की ओर से आज हाईकोर्ट में सीबीआई जांच कराने की अंडरटेकिंग पेश कर की गई, जिसे कोर्ट ने रिकार्ड पर लेकर उन्हें सुप्रीम कोर्ट से इस आशय का क्लेरिफिकेशन आदेश लाने के निर्देश दिए हैं ।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक