डायल-112 के 972 करोड़ ठेके पर हाईकोर्ट की मुहर, सरकार को राहत
जबलपुर, 23 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश में डायल-112 सेवा के 972 करोड़ रुपये के ठेके को लेकर दायर याचिका पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को राहत दी है। कोर्ट ने इस ठेके को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सोमवार को कहा कि टेंडर प्रक्रिया में कोई तथ्यात्मक गड़बड़ी नहीं पाई गई, इसलिए न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकता। यह याचिका बीवीजी इंडिया लिमिटेड की ओर से दायर की गई थी। कंपनी ने ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विस को दिए गए 5 साल के ठेके को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि चयनित कंपनी ने टेंडर में फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं, इसलिए उसे अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपमहाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने दलील दी कि टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कार्यादेश भी जारी किया जा चुका है। कोर्ट ने 17 अक्टूबर को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया।
याचिकाकर्ता कंपनी ने यह भी दावा किया था कि वह पिछले 10 वर्षों से मध्यप्रदेश में डायल-112 सेवा संचालित कर रही है और देश की कई प्रमुख संस्थाओं—जैसे संसद, राष्ट्रपति भवन और सुप्रीम कोर्ट—में सेवाएं दे रही है।
डायल-112 देशभर में आपातकालीन सहायता के लिए एकीकृत हेल्पलाइन नंबर है। इस पर कॉल करने पर पुलिस, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी सेवाएं तुरंत उपलब्ध कराई जाती हैं। दुर्घटना, अपराध या आगजनी जैसी स्थिति में आम नागरिक इस नंबर के जरिए तत्काल मदद प्राप्त कर सकते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक