विधायक संजय पाठक का हलफनामा, भूलवश लगा कॉल, हाईकोर्ट ने उपस्थिति की अनिवार्य

 


जबलपुर, 06 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने भाजपा विधायक संजय सत्येन्द्र पाठक के खिलाफ चल रहे आपराधिक अवमानना मामले में सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सोमवार सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया है कि विधायक को पहले व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा, उसके बाद ही उनके द्वारा दायर हलफनामे पर विचार किया जाएगा।

विधायक की ओर से प्रस्तुत हलफनामे में कहा गया है कि उनसे गलती से जस्टिस विशाल मिश्रा का नंबर डायल हो गया था और एक घंटी बजते ही कॉल काट दिया गया। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विधायक का पक्ष रखा, लेकिन बेंच ने दोटूक कहा कि व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य है और उसके बिना किसी भी दलील या शपथपत्र पर विचार संभव नहीं है।

गौरतलब है कि यह मामला 1 सितंबर 2025 को सामने आया था, जब जस्टिस विशाल मिश्रा ने ओपन कोर्ट में बताया था कि विधायक ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की थी। उस समय उनके समक्ष विधायक के परिवार से जुड़े एक खनन मामले की सुनवाई चल रही थी। निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उन्होंने खुद को मामले से अलग (रिक्यूज) कर लिया था।

उल्लेखनीय है कि कटनी निवासी आशुतोष मनु दीक्षित द्वारा दायर याचिका के बाद मामला आगे बढ़ा। 2 अप्रैल की सुनवाई में हाईकोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए कहा कि यह न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ा विषय है और प्रथम दृष्टया यह आपराधिक अवमानना का मामला बनता है।

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि व्यक्तिगत उपस्थिति के बिना इस हलफनामे पर कोई विचार नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल को तय की गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक