ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मृत्यु मामले में सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र
जबलपुर, 19 मई (हि.स.)। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के अधिवक्ता एवं सामाजिक मामलों से जुड़े अधिवक्ता विवेक तिवारी ने ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मृत्यु के मामले को लेकर देश की न्याय व्यवस्था के सर्वोच्च पदों तक अपनी चिंता पहुंचाई है। अधिवक्ता विवेक तिवारी ने मंगलवार को लिखे एक पत्र में उल्लेख किया है कि मृतका ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने उनसे संपर्क कर अपनी पुत्री को न्याय दिलाने की गुहार लगाई थी।
पत्र में कहा गया है कि भोपाल के कटारा हिल्स थाना में दर्ज अपराध क्रमांक 133/2026 में दहेज प्रताड़ना, मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न तथा संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि मामले की एक आरोपी सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रह चुकी हैं और वर्तमान में उपभोक्ता फोरम भोपाल में पदस्थ हैं, जिससे पीड़ित परिवार के मन में जांच की निष्पक्षता को लेकर आशंका उत्पन्न हो रही है। उन्हें तत्काल उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष पद से हटाया भी जाए।
अधिवक्ता विवेक तिवारी ने इस संबंध में भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश तथा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश को विस्तृत प्रतिनिधित्व पत्र भेजकर मामले में निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं पारदर्शी जांच की मांग की है।
अधिवक्ता विवेक तिवारी ने अपने प्रतिनिधित्व में एम्स भोपाल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट में एंटी-मॉर्टम हैंगिंग, शरीर पर कई चोटों के निशान तथा फॉरेंसिक सैंपल सुरक्षित रखे जाने जैसी महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं, जो मामले को अत्यंत गंभीर बनाती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आरोपियों को जमानत मिलने के बाद पीड़ित परिवार को गवाहों को प्रभावित करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ और महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक एवं फॉरेंसिक साक्ष्य नष्ट किए जाने की आशंका है।
अधिवक्ता विवेक तिवारी ने अपने पत्र में मांग की है कि मामले की स्वतंत्र एजेंसी या उच्च स्तरीय निगरानी में जांच कराई जाए, सभी इलेक्ट्रॉनिक एवं फॉरेंसिक साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं तथा पीड़ित परिवार और गवाहों को सुरक्षा प्रदान की जाए।उन्होंने कहा कि दहेज मृत्यु जैसे मामले केवल एक परिवार का निजी विवाद नहीं बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास से जुड़े अत्यंत संवेदनशील विषय हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक