हेमंत कटारे का बड़ा बयान, कहा- महिलाओं के खाते में पैसे डालना सशक्तिकरण नहीं, फ्रीबीज योजनाएं बंद हों

 


भोपाल, 31 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश विधानसभा के कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने मंगलवार काे युवा विधायक सम्मेलन में फ्रीबीज योजनाओं पर तीखा बयान दिया। उन्होंने महिलाओं के बैंक खाते में सीधे पैसे डालने वाली योजनाओं की आलोचना करते हुए कहा कि ये महिला सशक्तिकरण के लिए हानिकारक हैं और इन्हें तुरंत बंद किया जाना चाहिए। कटारे ने मंच से अफसरशाही (ब्यूरोक्रेसी) और न्यायपालिका (ज्यूडिशरी) की जवाबदेही तय करने का भी मुद्दा उठाया।

हेमंत कटारे ने कहा कि आज के जनप्रतिनिधि डरते हैं कि कोई नाराज हो जाएगा। उन्होंने मंच से स्पष्ट किया कि अगर हम नाराजगी से डरते रहेंगे तो देश की सेवा कब करेंगे? मैं हर मंच पर कहूँगा कि फ्रीबीज योजनाएं बंद होनी चाहिए। कटारे ने कहा कि महिलाओं के खाते में पैसा डालकर यह नहीं कहा जा सकता कि वे सशक्त हो रही हैं। असली सशक्तिकरण उनके कौशल और क्षमता को पहचानकर किया जा सकता है। मेरा मानना है कि हर महिला के अंदर काबिलियत है, उसकी काबिलियत का उपयोग करके ही उसे असल में सशक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास पर भी जोर दिया और कहा कि बिना मेहनत के मिलने वाला पैसा लोगों की योग्यता निखारने का अवसर छीन लेता है। कांग्रेस विधायक कटारे ने सरकारों को सलाह दी कि अगर पैसा देना ही है, तो उसे शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च करें। उन्होंने कहा कि बच्चों को फ्री एजुकेशन दीजिए, गरीबों का इलाज मुफ्त कराइए। कैश देने वाली योजनाएं देश और जनता के लिए कारगर नहीं हैं।

अफसर और न्यायपालिका भी हों जवाबदेह

कटारे ने अफसरशाही और न्यायपालिका की जवाबदेही की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि “हमारे देश में ब्यूरोक्रेसी की कोई जवाबदारी नहीं है। अफसर एक बार नौकरी में आ जाते हैं और सोचते हैं कि उन्हें कोई हिला नहीं सकता। नेताओं की जवाबदेही है, लेकिन अफसरों और ज्यूडिशरी की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। वे जनता से मिलें या ना मिलें, काम करें या ना करें, कोई फर्क नहीं पड़ता। उनकी और ज्यूडिशरी की भी जवाबदेही होनी चाहिए। हमारी (नेताओं की) जवाबदेही तो है; अगर हम सही काम करेंगे तो जीतकर आएंगे, नहीं तो 5 साल बाद हार जाएंगे।”

युवा विधायकों के लिए नसीहत

संबोधन के अंत में कटारे ने सभी युवा विधायकों से दो बातों का खास ख्याल रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि हम जो भी बोल रहे हैं, बोलने से पहले एक बार सोचें कि वह देश के हित में है या नहीं। वहीं हमेशा यह ध्यान रखें कि हमारे बयान और काम उस जनता के हित में हैं या नहीं, जिसने हमें चुनकर भेजा है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे