मिट्टी के शिवलिंगों से सजा हरदैनिया पैलेस, गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे

 


मुरैना, 10 अगस्त (हि.स.)। सावन के दूसरे सोमवार पर मध्य प्रदेश के मुरैना जिला के अम्बाह में भगवान शिव की आराधना का भव्य दृश्य देखने को मिला। हरदैनिया पैलेस में दद्दा जी शिष्य परिवार एवं हर-हर महादेव टीम के संयुक्त तत्वावधान में असंख्य पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण, पूजन और महा रुद्राभिषेक कराया गया। सुबह से ही आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। परिवार सहित पहुंचे श्रद्धालुओं ने मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग बनाए और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनका अभिषेक कर भगवान शिव की आराधना की।

महा रुद्राभिषेक के बाद श्रद्धालुओं ने सामूहिक यज्ञ में आहुतियां अर्पित कीं। हवन कुंडों से उठता धुआं, मंत्रोच्चार और लगातार गूंजते हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा परिसर शिवमय हो गया। अम्बाह के साथ बरेह, पोरसा और आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आयोजन में शामिल हुए। आयोजकों की ओर से पूजन, अभिषेक और हवन के लिए आवश्यक सामग्री नि:शुल्क उपलब्ध कराई गई। आयोजन दद्दाजी एवं गुरुदेव भगवान श्री श्री 1008 माखन दास महाराज के आशीर्वाद और प्रेरणा से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में दद्दा जी शिष्य परिवार के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

श्रद्धा से बनाया, पूजन के बाद नदी में किया विसर्जन

पार्थिव शिवलिंग निर्माण की परंपरा में मिट्टी से शिवलिंग तैयार कर विधि-विधान से उनका पूजन और अभिषेक किया जाता है। आयोजन में श्रद्धालुओं ने स्वयं मिट्टी से शिवलिंग तैयार किए। पूजन, महा रुद्राभिषेक और हवन के बाद इन पार्थिव शिवलिंगों को श्रद्धापूर्वक दिमनी ले जाया गया। यहां क्वारी नदी में सामूहिक रूप से पार्थिव शिवलिंगों का विधि-विधान से विसर्जन किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का स्मरण करते हुए परिवार और क्षेत्र में सुख-शांति, खुशहाली एवं समृद्धि की कामना की। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और पुरुष शामिल रहे।

दद्दाजी के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास

महा रुद्राभिषेक के आचार्य गिरजाशंकर शास्त्री ने कहा कि आयोजन ब्रह्मलीन गृहस्थ संत पंडित देव प्रभाकर शास्त्री दद्दाजी के हर-हर महादेव, घर-घर महादेव’ के संकल्प को आगे बढ़ाने की कड़ी है। दद्दाजी के हृदय में चंबल क्षेत्र के लिए विशेष स्थान था। उन्होंने अपनी साधना और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से अलग-अलग आस्थाओं को एक सूत्र में जोड़ने का प्रयास किया।उन्होंने कहा कि दद्दाजी एक ही यज्ञ पंडाल में भगवान हर (शिव) और हरि (कृष्ण) की कथा सुनाते थे। पार्थिव शिवलिंग निर्माण और रुद्राभिषेक यज्ञ उनकी साधना का प्रमुख हिस्सा रहे। उनके सान्निध्य में अनेक स्थानों पर तीन दिवसीय पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं रुद्राभिषेक के आयोजन हुए। आचार्य शास्त्री ने बताया कि दद्दाजी का खेती-किसानी से भी गहरा जुड़ाव था। वे घनश्याम बाग में रहकर खेती के कार्यों की देखरेख करते थे। चंबल क्षेत्र के तपस्वी संत ब्रह्मलीन संत माखन दास महाराज से उनका विशेष स्नेह और आध्यात्मिक जुड़ाव रहा।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा