मेहनत और लगन से हासिल की मंजिल, डॉ. प्रियम विश्वकर्मा बनीं असिस्टेंट प्रोफेसर
शहडोल, 25 सितंबर (हि.स.)। मेहनत, लगन और निरंतर प्रयास के दम पर सफलता हासिल की जा सकती है। शहडोल जिले के ब्यौहारी तहसील अंतर्गत ग्राम सकंदी निवासी डॉ. प्रियम विश्वकर्मा ने इसे सच साबित कर दिखाया है। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में वाणिज्य विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर चयनित होकर उन्होंने न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि क्षेत्र के युवाओं के सामने भी सफलता की मिसाल पेश की है।
डॉ. प्रियम विश्वकर्मा, पिता रामनारायण विश्वकर्मा, ने अपनी सफलता का श्रेय निरंतर मेहनत, लगन और समर्पण के साथ पढ़ाई करने को दिया है। उनका कहना है कि सफलता भले ही देर से मिले, लेकिन ईमानदारी से किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता। लक्ष्य निर्धारित कर लगातार प्रयास करते रहने से मंजिल हासिल की जा सकती है।
डॉ. प्रियम विश्वकर्मा ने बताया कि ग्राम सकंदी उनकी जन्मभूमि है और यहीं से उनके जीवन की शुरुआती यात्रा शुरू हुई। उन्होंने जिले की तहसील गोहपारू से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की। इसके बाद कक्षा 11वीं और 12वीं की पढ़ाई मध्यप्रदेश सरकार की सुपर-100 योजना के तहत इंदौर से पूरी की।
स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा की दिशा में कदम बढ़ाया। डॉ. प्रियम ने बी.कॉम. और एम.कॉम. की पढ़ाई पूरी करने के बाद बनारस विश्वविद्यालय, वाराणसी से शिक्षा ग्रहण की। इसी विश्वविद्यालय से उन्होंने पीएच.डी. की उपाधि भी प्राप्त की। वर्ष 2025 में उन्हें पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की गई।
असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर चयन के बाद डॉ. प्रियम विश्वकर्मा ने अपनी सफलता के पीछे माता-पिता, परिवारजनों और गुरुजनों के योगदान को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि परिवार से मिले सहयोग और गुरुजनों के मार्गदर्शन ने उन्हें अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसी सहयोग और अपनी मेहनत के बल पर वह इस मुकाम तक पहुंच सकीं।
उनकी इस उपलब्धि से परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर उच्च शिक्षा हासिल करने और मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर चयनित होने की उनकी उपलब्धि क्षेत्र के विद्यार्थियों और युवाओं के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है।
डॉ. प्रियम विश्वकर्मा की सफलता यह संदेश देती है कि संसाधनों की सीमाओं के बावजूद यदि लक्ष्य के प्रति समर्पण और मेहनत बनी रहे तो सफलता हासिल की जा सकती है। उनकी शैक्षणिक यात्रा और उपलब्धि ग्रामीण अंचल के उन विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा है, जो उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से अपने भविष्य को नई दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला