राजगढ़ः गीता ज्ञान से जीवन में शांति और सकारात्मकता का संदेश, यज्ञ में बुराइयों-व्यसनों का किया त्याग

 


राजगढ़, 10 जुलाई (हि.स.)। मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में ब्रह्माकुमारी संस्थान और सोनकच्छ ग्रामवासियों के संयुक्त तत्वावधान में नवनिर्मित सामुदायिक भवन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भगवद् गीता प्रवचन का समापन शुक्रवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ। समापन अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों ने यज्ञकुंड में अपनी बुराइयों और व्यसनों का प्रतीकात्मक त्याग कर सद्मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

प्रवचनकर्ता ब्रह्माकुमारी सुरेखा दीदी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में अर्जुन को ज्ञानमय यज्ञ को सर्वोत्तम बताया है। ज्ञान की धारणाएं व्यक्ति के जीवन को यज्ञमय बनाती हैं, जिससे समाज और विश्व में शांति, सुख और पवित्रता का वातावरण निर्मित होता है। उन्होंने आत्मा, परमात्मा, कर्म, राजयोग और जीवन मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गीता का ज्ञान जीवन की हर समस्या का समाधान प्रदान करता है तथा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी व्यक्ति को स्थिर और सकारात्मक बनाए रखता है।

जिला प्रभारी बीके मधु दीदी ने कहा कि गीता में बताए गए राजयोग के नियमित अभ्यास से आंतरिक शक्तियों का विकास होता है और व्यक्ति तनाव, दुख व अशांति से सहज मुक्ति प्राप्त कर सकता है। उन्होंने सभी से आध्यात्मिक जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष चंद्र सिंह सोंधिया ने ब्रह्माकुमारी बहनों के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वे अपना जीवन समाजहित और आध्यात्मिक जागरण के लिए समर्पित कर रही हैं, जिसका सभी को सहयोग करना चाहिए। इस अवसर पर सरपंच हरिप्रसाद दांगी एवं ग्राम के गणमान्य नागरिकों ने बीके मधु दीदी, ब्यावरा सेवा केंद्र संचालिका बीके लक्ष्मी, पचोर सेवा केंद्र की बीके वैशाली और बीके सुरेखा दीदी का सम्मान किया। अंत में श्रीमद्भागवत की आरती, भजन-कीर्तन और महाप्रसादी के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। संचालन रामेश्वर दांगी ने किया। कार्यक्रम में आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनोज पाठक