अशोकनगर में पहली बार श्रीरामशरणम् परिवार द्वारा राम नाम दीक्षा एवं श्रीअमृतवाणी सत्संग का भव्य आयोजन

 




अशोकनगर, 21 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर मानस भवन में आगामी 24 मई 2026 (रविवार) को एक अत्यंत पावन और ऐतिहासिक आध्यात्मिक समागम होने जा रहा है। अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विशुद्ध आध्यात्मिक संस्था श्रीरामशरणम् परिवार द्वारा अशोकनगर जिले में प्रथम बार विशेष राम नाम दीक्षा एवं श्रीअमृतवाणी सत्संग का आयोजन किया जा रहा है।

श्रीरामशरणम् संस्था ने गुरुवार को यह जानकारी दी। संस्था ने कहा है कि यह आयोजन क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का एक अभूतपूर्व मार्ग खोलेगा।

शताब्दी वर्ष में अशोकनगर को मिली सौगात:

श्रीरामशरणम् संस्था की स्थापना वर्ष 1925 में हुई थी, जिसका अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय लाजपत नगर, दिल्ली में स्थित है। मानव मात्र को प्रभु राम के नाम से जोडक़र उनके जीवन का कल्याण करने में जुटी इस संस्था को राम काज करते हुए सफलतापूर्वक 100 वर्ष (शताब्दी) पूर्ण हो चुके हैं। इस गौरवमयी शताब्दी वर्ष में अशोकनगर के नागरिकों को इस विशुद्ध आध्यात्मिक धारा से जुडऩे का यह पहला और परम पावन अवसर मिल रहा है।

संस्था का मुख्य उद्देश्य:

श्रीरामशरणम् संस्था का एकमात्र और परम उद्देश्य भटके हुए मानव मन को राम नाम की महिमा से जोडऩा है। इसके माध्यम से व्यक्ति सांसारिक आपाधापी के बीच अपने बहुमूल्य जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और परम आनंद की प्राप्ति कर सकता है।

राम नाम का यह पावन मंत्र जीवन के सभी दुखों को हरकर परम कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।

कार्यक्रम की रूपरेखा (महत्वपूर्ण विवरण):

दिनांक: 24 मई 2026 (रविवार) स्थान: मानस भवन, अशोकनगर, समय- शाम 5 बजे।

मुख्य आकर्षण: सामूहिक श्रीअमृतवाणी पाठ, ध्यान, और राम नाम दीक्षा शुल्क पूर्णत: नि:शुल्क (परमार्थ के इस कार्य में कोई शुल्क देय नहीं है) आयोजकों ने विशेष अपील की है कि स्वयं भी परिवार सहित आएं, अपनों को भी लाएं।

श्रीरामशरणम् परिवार ने समस्त धर्मप्रेमी जनता, सामाजिक संगठनों और नागरिकों से करबद्ध प्रार्थना की है कि बिना किसी शुल्क के पतित-पावन राम नाम से जुडऩे का यह अलौकिक अवसर अपने हाथों से न जाने दें। इस पावन पुनीत कार्य में सहभागी बनते हुए अपने मित्रों, रिश्तेदारों, सगे-संबंधियों और पड़ोसियों को भी प्रेरित करें। उन्हें इस कार्यक्रम में साथ लेकर आएं, ताकि राम नाम की इस पावन गंगा में डुबकी लगाकर न केवल वे अपना, बल्कि दूसरों का भी परम कल्याण सुनिश्चित कर सकें।

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हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार